पानीपत। थाना किला क्षेत्र में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े और अवैध वसूली गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कार्रवाई में पानीपत जिले के गांव बिंझौल निवासी मनमोहित को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी पहचान पत्र बनाकर खुद को हरियाणा एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग का इंस्पेक्टर बताकर लोगों से अवैध वसूली करता था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से टैक्स विभाग का फर्जी आईडी कार्ड, दो मोबाइल फोन, टाटा हैरियर कार और कार से दो फर्जी नंबर प्लेट बरामद कर कब्जे में ली हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी अकेले नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत यह काम कर रहा था।
पुलिस की प्राथमिक जांच में कई अधिकारियों से मिलीभगत के संकेत मिले हैं। इसमें रमेश मांडी और अभिनव पूनिया (सेल्स टैक्स इंस्पेक्टर, पानीपत), हंसलाल (ईटीओ), वीरेंद्र (इंस्पेक्टर, जगाधरी), पवन (इंस्पेक्टर, करनाल), राकेश (इंस्पेक्टर, कुरुक्षेत्र) और अजय (इंस्पेक्टर, पंचकूला) के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने इन सभी को नामजद करते हुए मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, मनमोहित ट्रांसपोर्टरों और कोरियर कंपनियों की गाड़ियों को टैक्स चोरी का हवाला देकर रास्ते में रुकवाता था और खुद को अधिकारी बताकर डराता-धमकाता था। इसके बाद वह मौके पर भारी-भरकम जुर्माना बताता, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कम जुर्माना दर्ज करवाया जाता था।
पुलिस का कहना है कि बाकी बची रकम को आपसी साठगांठ के जरिए बांट लिया जाता था, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह अलग-अलग जिलों में तैनात टैक्स अधिकारियों के संपर्क में रहकर यह अवैध वसूली करता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अवैध वसूली से मिली रकम का लेन-देन अपने और अपने स्वजन के बैंक खातों तथा यूपीआई के जरिए करता था। अब पुलिस मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच, बैंक खातों की जांच और डिजिटल ट्रांजैक्शन की पड़ताल कर रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।