चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को लागू करना हरियाणा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जिसमें राज्य में कार्यरत ठेका कर्मचारियों को नियमित करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट के फैसले को लागू कराने के दबाव में कर्मचारी संगठनों ने 12 फरवरी को राज्यव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया है।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने और अवमानना से बचने के उद्देश्य से ठेका कर्मचारियों का हरियाणा कौशल रोजगार निगम के पोर्टल पर पंजीकरण करा रही है, जबकि नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 31 दिसंबर 2025 तक दस वर्ष की सेवा पूरी कर चुके ठेका कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश हरियाणा सरकार को दिया था। हाईकोर्ट ने 41 सिविल रिट याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया कि वर्ष 1993, 1996, 2003 और 2011 में लागू की गई नियमितीकरण नीतियों के तहत पात्र होने के बावजूद जो कर्मचारी किसी कारणवश नियमित नहीं हो सके, उन्हें भी नियमित किया जाए।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन ठेका कर्मचारियों की सेवा 31 दिसंबर 2025 तक दस वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें भी नियमित किया जाए, चाहे वे पूर्व की नीतियों के दायरे में आते हों या नहीं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि यदि पद स्वीकृत नहीं हैं तो सरकार नए पद स्वीकृत करे और पात्र कर्मचारियों को नियमित किया जाए। साथ ही, नियमित होने वाले कर्मचारियों को उस वर्ष से पूरा वेतन छह प्रतिशत ब्याज सहित दिया जाए, जिस वर्ष से वे नियमित होने के पात्र थे।
हाईकोर्ट ने इस आदेश को लागू करने के लिए हरियाणा सरकार को आठ सप्ताह का समय दिया है, जिसकी अवधि फरवरी के अंत में समाप्त हो रही है। इससे पहले सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने 19 जनवरी को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन कर सरकार से कोर्ट के आदेश को लागू करने की मांग की थी।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह लागू करने के बजाय सरकार हरियाणा कौशल रोजगार निगम में कार्यरत करीब 1.20 लाख कर्मचारियों में से पांच साल की सेवा पूरी कर चुके ठेका कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु तक जॉब सिक्योरिटी देने की प्रक्रिया में जुटी है। सरकार ने पहले 31 जनवरी तक संबंधित कर्मचारियों को पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने के निर्देश दिए थे, जिसे अब बढ़ाकर 20 फरवरी कर दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस प्रक्रिया से यह संकेत मिलता है कि सरकार नियमितीकरण के बजाय वैकल्पिक रास्ता अपनाकर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना से बचना चाहती है।
सुभाष लांबा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार के पास केवल दो ही विकल्प हैं—या तो फैसले को पूरी तरह लागू किया जाए या फिर इसके खिलाफ अपील दायर की जाए। उनका आरोप है कि सरकार दोनों विकल्पों के बीच जॉब सिक्योरिटी का रास्ता अपनाकर नियमितीकरण से बचने की कोशिश कर रही है।
वहीं, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने हाईकोर्ट के फैसले को अक्षरशः लागू कराने के लिए 12 फरवरी को हड़ताल का निर्णय लिया है। संघ के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी जॉब सिक्योरिटी नहीं, बल्कि कोर्ट के आदेश के अनुसार पूर्ण नियमितीकरण की मांग पर अडिग हैं।