नई दिल्ली | शहरों में बढ़ते मकान किराए और महंगाई की मार झेल रहे नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्र सरकार ने राहत भरी खबर दी है। सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़ी पुराने नियमों में बदलाव करने की योजना बना रही है। इस बदलाव का सीधा लाभ उन लाखों कर्मचारियों को होगा, जो बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में रहकर काम कर रहे हैं।
50% HRA छूट अब नए शहरों में भी लागू
वर्तमान में केवल चार महानगर—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई—में कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी के 50% तक HRA पर टैक्स छूट मिलती है। बाकी शहरों के लिए यह सीमा केवल 40% थी। नए प्रस्ताव के अनुसार बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी इस 50% क्लब में शामिल किया जाएगा। यानी अब इन उभरते हुए महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों को भी बड़े शहरों जैसी टैक्स राहत मिल सकेगी।
बदलाव की आवश्यकता क्यों?
पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे देश के बड़े आईटी और सर्विस हब बन चुके हैं। इन शहरों में रहने का खर्च और मकानों का किराया अब दिल्ली-मुंबई के बराबर हो गया है। पुराने नियमों के कारण इन शहरों के कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। सरकार का मानना है कि नए नियमों से कर्मचारियों की बचत बढ़ेगी और उनका वित्तीय बोझ कम होगा।
पुराने टैक्स रेजीम के कर्मचारियों को बड़ी राहत
इस बदलाव का लाभ विशेष रूप से ‘ओल्ड टैक्स रिजीम’ के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। नए टैक्स सिस्टम में HRA जैसी छूट का प्रावधान नहीं है, इसलिए पुराने नियम चुनने वालों के लिए यह एक महत्वपूर्ण लाभ है। टैक्सेबल इनकम घटने से हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी में इजाफा होगा।
क्या होगा नया स्ट्रक्चर?
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो देश के कुल आठ बड़े शहर 50% HRA छूट की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे—चार पुराने महानगर और चार नए उभरते टेक हब। बाकी शहरों के लिए 40% की पुरानी सीमा ही लागू रहेगी। यह कदम मिडिल क्लास परिवारों के लिए राहत का संदेश है, जो बढ़ते शहरी खर्चों के बीच अपनी बचत बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।