जालंधर । स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 28 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रही काला संघिया ड्रेन एक बार फिर बदइंतजामी और गंदगी की मिसाल बनती नजर आ रही है। फोकल पॉइंट से लेकर बस्ती पीरदाद तक फैली यह ड्रेन शहर की कई कॉलोनियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है।
ड्रेनेज विभाग और स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर ड्रेन के किनारों को पक्का किया गया, पुल बनवाए गए, लेकिन जमीनी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा। ड्रेन के अंदर जगह-जगह गंदगी जमी हुई है और कच्चे हिस्सों में जंगली घास व पौधे उग आए हैं।
प्रोजेक्ट के नाम पर जारी हुए करोड़ों के टेंडर
इस प्रोजेक्ट के तहत 7.77 करोड़, 7.53 करोड़, 7.23 करोड़ और 5.92 करोड़ रुपये के चार प्रमुख टेंडर जारी किए गए। योजना में ड्रेन के किनारे मजबूत करना, पुलियां बनाना और जल प्रवाह को बेहतर करना शामिल था। हालांकि ड्रेन का तल जानबूझकर कच्चा छोड़ा गया ताकि वाटर रिचार्जिंग हो सके, लेकिन अब यही हिस्सा गंदगी का अड्डा बन गया है, जिससे बदबू और मच्छरों का संकट खड़ा हो गया है।
अधूरे वादे: ग्रीन बेल्ट और ट्रैक भी अधर में
करीब 14 किलोमीटर लंबी इस ड्रेन के किनारे वॉकिंग ट्रैक, स्ट्रीट लाइट, बेंच, कूड़ेदान, शौचालय और हरियाली विकसित करने की योजना थी, लेकिन अधिकांश कार्य अभी अधूरे हैं। बिस्त दोआब नहर से पानी लाकर ड्रेन को स्वच्छ रखने का दावा भी अब तक कागजों तक ही सीमित है।
स्थानीय निवासियों की नाराजगी
समाजसेवी असीम मिश्रा और बलबीर कौर ने ड्रेन की मौजूदा हालत पर गहरी नाराजगी जताई है। बलबीर कौर ने बताया कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद हालत जस की तस है। जगह-जगह गंदगी और झाड़ियां फैली हैं। उनका कहना है कि मानसून आने ही वाला है और यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो आसपास की झुग्गियों में गंदा पानी घुस सकता है। इसके साथ ही बारिश में सांप जैसे जहरीले जीव-जंतु भी घरों में घुस सकते हैं।
बलबीर कौर ने बताया कि वे जल्द ही नगर निगम अधिकारियों और मेयर को एक ज्ञापन सौंपेंगी, जिसमें ड्रेन की तत्काल सफाई और नियमित रखरखाव की मांग की जाएगी।