शिमला। हिमाचल प्रदेश में निवेश ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पता चलते ही पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रदेश में इस सोसायटी के लगभग 37 केंद्र सक्रिय थे, जबकि इसका नेटवर्क आठ राज्यों तक फैला हुआ था। इसमें हिमाचल प्रदेश के अलावा हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, असम, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
आरोप है कि ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड ने लगभग 5000 एजेंटों की संगठित चेन के माध्यम से आम लोगों को उच्च रिटर्न, सुरक्षित निवेश और शीघ्र लाभ का झांसा देकर राशि जमा करवाई। बाद में भुगतान में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं और निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
जांच दस्तावेजों के अनुसार विभिन्न जिलों से लगभग 200 करोड़ रुपये की राशि जमा हुई है, जो इस मामले को प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में शामिल कर रहा है। जिलावार आंकड़ों में सबसे अधिक ठगी जिला ऊना में हुई। यहां से 70,70,20,000 रुपये जमा कराए गए। इसके अलावा सिरमौर से 11.86 करोड़, कांगड़ा से 8.50 करोड़, शिमला से 5 करोड़, सोलन से 3.77 करोड़, बिलासपुर से 2 करोड़ और मंडी से 78 लाख रुपये की राशि एकत्र हुई। यह आंकड़े केवल हिमाचल प्रदेश के हैं, जबकि जांच अभी जारी है।
बताया गया है कि एजेंट गांव-गांव, पंचायत स्तर, कस्बों और शहरों में सक्रिय थे। उन्होंने लोगों को एफडी, आरडी, डिपाजिट स्कीम और अन्य निवेश योजनाओं के नाम पर जोड़ा। 37 केंद्रों के माध्यम से एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया, जिसमें स्थानीय बैठकों, प्रचार और भरोसे के जरिए निवेशकों को उच्च रिटर्न का लालच दिया जाता था। कई मामलों में बुजुर्ग, कर्मचारी, छोटे व्यापारी और ग्रामीण परिवार इस नेटवर्क के शिकार बने। 37 एजेंटों की शिकायत के आधार पर यह मामला सीआईडी थाना शिमला में दर्ज किया गया है।