जींद। हरी झंडी से हाइड्रोजन ट्रेन का रनिंग ट्रायल जींद में तीसरे दिन भी जारी रहा। इस बार ट्रेन का परीक्षण बिना पानी की कैन के किया गया, जबकि पहले दो दिन ट्रायल के दौरान प्रत्येक डिब्बे में 30-35 पानी की कैन रखी गई थीं।
ट्रेन हाइड्रोजन प्लांट यार्ड से रवाना हुई और जींद जंक्शन पहुंची। वहां से ट्रेन दोपहर 2 बजे सोनीपत के लिए प्रस्थान की। पहले भंभेवा स्टेशन और फिर पांडू पिंडारा स्टेशन तक ट्रेन की वायरिंग और तकनीकी सिस्टम की जाँच की गई। पांडू पिंडारा से ट्रेन को सोनीपत भेजा गया, जहां ट्रेन शाम लगभग पांच बजे पहुंची।
सोनीपत से वापस जींद के लिए ट्रेन शाम 5 बजकर 35 मिनट पर रवाना हुई। इस दौरान ट्रेन ने 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की, जो इसे पिछले ट्रायल की तुलना में और अधिक सक्षम साबित करती है।
पहले दो ट्रायल के दौरान ट्रेन में परीक्षण टीम के साथ पानी की कैन रखी गई थी ताकि संचालन के दौरान हाइड्रोजन स्तर और ऊर्जा दक्षता को मापा जा सके। ट्रायल में यह कैन हटाई गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ट्रेन बिना अतिरिक्त भार के भी सुरक्षित और स्थिर गति से दौड़ सकती है।
इस टेस्ट रन के दौरान तकनीकी और सुरक्षा मानकों की पूरी जाँच की गई। ट्रेन के प्रत्येक डिब्बे में ऊर्जा प्रबंधन, वायरिंग, ब्रेकिंग सिस्टम और नियंत्रण पैनल की जांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन ने ट्रायल में 85 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति भी हासिल की।
हाइड्रोजन ट्रेन प्रोजेक्ट हरियाणा में भविष्य के लिए साफ ऊर्जा और कम प्रदूषण वाले परिवहन के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में ट्रेन का फाइनल ट्रायल और अधिक लंबी दूरी पर किया जाएगा, ताकि इसे नियमित परिचालन के लिए तैयार किया जा सके।