Summer Express,कांगड़ा | इच्छामृत्यु के बाद 13 वर्षों की लंबी पीड़ा से मुक्त हुए हरीश राणा की अस्थियां गंगा में विसर्जित कर दी गईं। इसके बाद उनका परिवार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित अपने पैतृक गांव पलेटा के लिए रवाना हो गया, जहां तेरहवीं सहित अन्य सभी धार्मिक कर्मकांड संपन्न किए जाएंगे।
इससे पहले, गाजियाबाद स्थित राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसायटी में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। गहरे शोक में डूबे परिवार को मनाने के बाद ही उन्हें इसमें शामिल कराया जा सका।
पिता अशोक राणा भी कई बार आग्रह के बाद सभा में पहुंचे और गमगीन माहौल में उपस्थित लोगों ने हरीश राणा को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी। सोसायटी निवासियों ने यह भी जताया कि अंतिम संस्कार और उसके बाद तक किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी का परिवार से मिलने का प्रयास नहीं हुआ।
हरीश राणा के मामा मिलाप राणा ने बताया कि सभी धार्मिक विधियां संपन्न करने के बाद परिवार अपने पैतृक गांव लौट रहा है। शु। इस खबर के बाद पलेटा और आसपास के क्षेत्रों में शोक और संवेदना का माहौल गहरा गया।
ग्रामीणों ने कहा कि हरीश राणा का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी भावनात्मक क्षति है। भले ही उनका परिवार लंबे समय से गांव से बाहर रहा, लेकिन उनका गांव से जुड़ाव हमेशा बना रहा। ग्रामीण इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े हैं और हरीश राणा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।