Summer express,नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है, जिसका प्रभाव भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारतीय ऑयल बास्केट की औसत कीमत मार्च 2026 में बढ़कर 113.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जो पिछले चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मार्च 2023 में यह स्तर 112.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था।
1 अप्रैल को भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की कीमत 120.84 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर आर्थिक दबाव बढ़ता दिख रहा है।
तेल की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण देखी जा रही है। Strait of Hormuz में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करती है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। इसके अलावा सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती और रूस में ड्रोन हमलों ने भी आपूर्ति को प्रभावित किया है।
इसी बीच, तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC+ की एक अहम बैठक रविवार को प्रस्तावित है, जिसमें मई महीने के उत्पादन कोटे पर चर्चा की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि संगठन उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर सकता है, जिससे कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। पिछली बैठक में 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस बार अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने की संभावना है।
वहीं, इस संकट का सबसे बड़ा असर इराक पर देखने को मिला है, जहां तेल राजस्व में फरवरी की तुलना में 70% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। चूंकि देश की लगभग 90% आय तेल निर्यात पर निर्भर है, इसलिए अब इराक सीरिया के रास्ते टैंकर ट्रकों के जरिए तेल निर्यात करने को मजबूर है।