Summer express/शिमला : हिमाचल प्रदेश में एचपीटीडीसी (हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम) के होटलों के संभावित निजीकरण को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए इसे नीति और नेतृत्व के स्तर पर असमंजस की स्थिति करार दिया है।
पूर्व मंत्री डॉ. राजीव सहजल ने कहा कि सरकार के भीतर इस मुद्दे पर स्पष्टता का अभाव दिख रहा है। उनका कहना है कि एक ओर संबंधित पदाधिकारी निजीकरण की जानकारी से इनकार कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर इस दिशा में कदम उठाए जाने के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार के अंदर समन्वय की कमी का उदाहरण बताया।सहजल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश के पर्यटन ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले एचपीटीडीसी होटलों को घाटे का हवाला देकर निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह कदम प्रदेश की सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले संस्थानों को कमजोर किया जाता है और फिर उन्हें घाटे में दिखाकर निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाती है। उनके अनुसार, यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के भीतर अलग-अलग बयानों से भ्रम की स्थिति बन रही है, जिससे जनता में अविश्वास पैदा हो रहा है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एक ओर होटलों के रखरखाव और सुधार पर भारी खर्च किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें निजी हाथों में देने की बात सामने आ रही है।भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तो पार्टी इसे जन-जन तक ले जाएगी। उनका कहना है कि प्रदेश के संसाधनों और संपत्तियों के संरक्षण के लिए यह मुद्दा अहम है और इसका विरोध जारी रहेगा।