Summer express/कांगड़ा, कपिल:ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक “टेढ़ा मंदिर” एक बार फिर चर्चा में है। कांगड़ा घाटी में 4 अप्रैल 1905 को आए विनाशकारी भूकंप की याद इस मंदिर के रूप में आज भी जीवित है। भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी को समर्पित यह प्राचीन मंदिर उस भूकंप में टेढ़ा हो गया था, लेकिन आज भी उसी स्थिति में अडिग खड़ा है और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
घने जंगलों के बीच पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग ढाई किलोमीटर का पैदल मार्ग है। इसके अलावा सड़पी और नागनी माता मंदिर होते हुए सुरानी रोड से करीब सात किलोमीटर लंबा रास्ता भी उपलब्ध है। मंदिर परिसर में राम दरबार के साथ माता सीता की गुफा, लक्ष्मण तपोस्थली और हनुमान जी की गुफा भी मौजूद हैं, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि मुगल काल में यहां से एक नहर का निर्माण किया गया था, जिसके अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। वर्ष 2007 में सुरक्षा कारणों से यहां की अष्टधातु मूर्तियों को संग्रहालय में सुरक्षित रख दिया गया था, जिसके बाद से मंदिर में सीमेंट की प्रतिमाएं स्थापित हैं। स्थानीय लोग अब मूल मूर्तियों की वापसी की मांग कर रहे हैं।मंदिर न्यास ने इस स्थल के विकास के लिए नई योजना तैयार की है। इसके तहत मंदिर परिसर की मरम्मत, रंग-रोगन, जलाशय निर्माण, फेंसिंग और रास्तों को सुगम बनाया जाएगा। साथ ही “परिक्रमा योजना” के जरिए ज्वालाजी आने वाले श्रद्धालुओं को टेढ़ा मंदिर से भी जोड़ा जाएगा, ताकि दोनों स्थानों के दर्शन एक साथ हो सकें।श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलिंग, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और प्रकाश जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि सौंदर्यीकरण के साथ-साथ मंदिर की मूल पहचान बनाए रखने के लिए अष्टधातु मूर्तियों की वापसी भी जरूरी है।