नई दिल्ली। केंद्र सरकार अब फास्टैग (FASTag) को केवल टोल भुगतान के साधन तक सीमित नहीं रखना चाहती। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इसे एक मल्टी-सर्विस डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। नई योजना के तहत फास्टैग का उपयोग इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग, पार्किंग पेमेंट और बीमा सेवाओं में भी किया जा सकेगा।
फिनटेक कंपनियों के साथ हुई अहम बैठक
इसी उद्देश्य से इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) ने बुधवार को कई फिनटेक कंपनियों के साथ बैठक की। इस बैठक में फास्टैग के संभावित विस्तार, कानूनी पहलुओं, सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और यूजर एक्सपीरियंस पर विस्तार से चर्चा हुई।
MLFF सिस्टम पर भी विचार
इस मीटिंग में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। यह तकनीक बिना वाहन रोके टोल भुगतान की सुविधा देती है, जिसमें फास्टैग और वाहन नंबर को RFID और ANPR तकनीक के जरिए स्कैन किया जाता है। इससे हाइवे पर ट्रैफिक की रफ्तार बनी रहती है और भुगतान सहज तरीके से हो जाता है।
फास्टैग की मौजूदा स्थिति
फास्टैग आधारित नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) देशभर के 1,728 टोल प्लाजा पर सक्रिय है और वर्तमान में 98.5% से अधिक टोल भुगतान डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं। अब तक 11.04 करोड़ से अधिक फास्टैग जारी किए जा चुके हैं, जो इसकी लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाता है।
गडकरी ने जताई उम्मीदें
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “फास्टैग सिर्फ एक टोल पेमेंट सिस्टम नहीं है, यह भविष्य में मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी तमाम सेवाओं का एकीकृत प्लेटफॉर्म बन सकता है। हम चाहते हैं कि लोग एक ही टैग से न केवल टोल चुकाएं बल्कि पार्किंग, EV चार्जिंग और इंश्योरेंस पेमेंट भी कर सकें।”