नई दिल्ली। भारत ने साल 2025 में रूस से समुद्री मार्ग के जरिए कच्चा तेल आयात करने में सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है। खास बात यह है कि रूस के प्रमुख क्रूड ऑयल ग्रेड ‘यूरल्स’ (Urals) का करीब 80% हिस्सा अकेले भारत ने खरीदा है, और यह खरीद मुख्य रूप से दो निजी कंपनियों – रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और नायरा एनर्जी लिमिटेड द्वारा की गई है। इस बीच सरकारी तेल कंपनियां इस होड़ में पिछड़ती नजर आ रही हैं।
23 करोड़ बैरल से ज्यादा यूरल्स खरीद चुका है भारत
ऊर्जा क्षेत्र की डेटा फर्म केप्लर के मुताबिक, भारत ने साल 2025 में अब तक (24 जून तक) रूस से 23.1 करोड़ बैरल यूरल्स कच्चा तेल खरीदा है। इनमें से अकेले रिलायंस ने 7.7 करोड़ बैरल का आयात किया, जिससे वह दुनिया की सबसे बड़ी यूरल्स खरीदार बन गई है। वहीं नायरा एनर्जी के कुल क्रूड आयात में यूरल्स की हिस्सेदारी 72% तक पहुंच गई है।
चीन की मांग घटी, भारत को मिला फायदा
पहले रूस से अधिक कच्चा तेल आयात करने के मामले में चीन अग्रणी था, लेकिन हाल के महीनों में वहां टैक्स नियमों की सख्ती और घरेलू मांग में गिरावट के चलते खरीद कम हो गई है। इसका सीधा लाभ भारत को मिला है, जो रूस के प्रमुख ग्राहक के रूप में उभरा है।
सरकारी तेल कंपनियों की भागीदारी कम क्यों?
सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) रूस से तेल खरीदने में पीछे रह गई हैं। इसका प्रमुख कारण है भुगतान प्रणाली से जुड़ी जटिलताएं। पहले जहां इन्हें प्रति बैरल $4 का डिस्काउंट मिलता था, अब वह घटकर $2 रह गया है। इससे इनके लिए रूसी तेल खरीदना कम फायदेमंद हो गया है।