29 June, 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। यह दिन धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश आदि सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।
देवशयनी एकादशी 2025: तिथि और पूजा मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 5 जुलाई 2025, शनिवार, शाम 6:58 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 6 जुलाई 2025, रविवार, रात 9:14 बजे
- उदया तिथि अनुसार व्रत की तिथि: 6 जुलाई 2025 (रविवार)
व्रत पारण (उपवास खोलने) का समय
- तिथि: 7 जुलाई 2025, सोमवार
- समय: सुबह 5:29 बजे से 8:16 बजे तक
धार्मिक महत्त्व
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ होता है, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसलिए चार महीनों तक विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश जैसे शुभ संस्कार वर्जित माने जाते हैं। इस समय भक्ति, साधना और सात्विक जीवन का विशेष महत्व होता है।
देवशयनी एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- ❌ तुलसी के पत्ते न तोड़ें – यह निषेध है, इससे देवी लक्ष्मी अप्रसन्न होती हैं।
- ❌ काले वस्त्र न पहनें – यह दिन के लिए अशुभ माना जाता है।
- ❌ तामसिक भोजन न करें – मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, बैंगन का त्याग करें।
- ❌ तेल और मसालेदार भोजन से बचें।
- ✅ तन और मन दोनों को रखें सात्विक।
- ✅ घर की सफाई और वातावरण को रखें शुद्ध।