बैंकॉक | थाईलैंड की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री पैतोंगटर्न शिनावात्रा को उनके पद से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई एक विवादित फोन कॉल के सामने आने के बाद की गई, जिसमें संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन और सत्ता के दुरुपयोग की बात सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक गोपनीय कॉल लीक हुई है जिसमें प्रधानमंत्री शिनावात्रा कथित रूप से न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थानों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थीं। अदालत ने इस कॉल को संविधान के खिलाफ मानते हुए इसे अनुच्छेद उल्लंघन करार दिया और तुरंत प्रभाव से उन्हें कार्य से अलग कर दिया।
किसे सौंपी गई जिम्मेदारी?
शिनावात्रा को पद से हटाए जाने के बाद देश की कार्यकारी जिम्मेदारियां उप-प्रधानमंत्री को सौंप दी गई हैं। संवैधानिक अदालत ने साफ किया है कि जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक शिनावात्रा किसी भी सरकारी शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकेंगी।
पार्टी का पलटवार: राजनीतिक साजिश का आरोप
फ्यू थाई पार्टी, जिससे शिनावात्रा ताल्लुक रखती हैं, ने अदालत के इस फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी ने कहा है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है और इसे जनता के जनादेश का अपमान बताया।
राजनीतिक हलचल तेज, मध्यावधि चुनाव की अटकलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर अदालत शिनावात्रा को दोषी ठहराती है, तो देश में नई सरकार के गठन या मध्यावधि चुनाव की स्थिति बन सकती है। इससे थाईलैंड में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।