Summer express, चंडीगढ़ | हरियाणा के दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारी अब 60 वर्ष की आयु तक नौकरी जारी नहीं रख सकेंगे। अदालत ने राज्य सरकार के नए नियमों को वैध ठहराते हुए सेवा विस्तार की मांग से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
दरअसल, हरियाणा सरकार ने 3 फरवरी 2026 को ‘हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 2016’ में संशोधन किया था। इस बदलाव के तहत दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाला दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया। पहले ऐसे कर्मचारियों को 58 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद 60 वर्ष तक सेवा में बने रहने की सुविधा दी जाती थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए श्याम लाल शर्मा समेत कई कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें पुराने नियमों के तहत पहले ही 60 वर्ष तक सेवा का लाभ मिल चुका था और नए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ग्रुप-डी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों को अभी भी 60 वर्ष तक सेवा का लाभ दिया जा रहा है, जिससे समानता के अधिकार का उल्लंघन होता है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने कर्मचारियों की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु तय करना सरकार की नीतिगत और प्रशासनिक शक्तियों के दायरे में आता है तथा राज्य सरकार को सेवा शर्तों में बदलाव करने का पूरा अधिकार है।
अदालत ने अपने फैसले में ‘रजनीश कुमार बनाम हरियाणा सरकार’ मामले में डिवीजन बेंच के पुराने निर्णय का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि संशोधित नियम वर्तमान कर्मचारियों पर भी लागू होंगे। ऐसे में 3 फरवरी 2026 के बाद कोई भी कर्मचारी 58 वर्ष से अधिक सेवा जारी रखने का कानूनी दावा नहीं कर सकता।
इस फैसले के बाद राज्य के सैकड़ों दिव्यांग कर्मचारियों को तय समय से दो साल पहले ही सेवानिवृत्त होना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक सुधारों और नई नीतियों के तहत लिया गया है। वहीं हाईकोर्ट ने न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी पीठ के फैसले को ही आधार माना जाएगा।