Summer express/अंबाला-:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन के बाद अंबाला में लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देशहित को ध्यान में रखते हुए लोगों से अपील की कि यदि बहुत जरूरी न हो तो अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें, खाने-पीने की चीजों में विशेष रूप से तेल का कम इस्तेमाल करें और ज्यादा से ज्यादा यात्रा मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन से करें ताकि पेट्रोल और डीजल की बचत हो सके। इसके साथ ही उन्होंने जरूरत पड़ने पर “वर्क फ्रॉम होम” को भी अपनाने की बात कही।
प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर अंबाला के व्यापारियों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे देशहित में लिया गया जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सोने के कारोबार से जुड़े सर्राफ व्यापारी शीशपाल भोला ने प्रधानमंत्री की बात का समर्थन करते हुए कहा कि पहले से ही सोने की बढ़ती कीमतों के कारण लोग खरीदारी में सावधानी बरत रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक स्थिति और भविष्य को देखते हुए यह अपील की है तो निश्चित रूप से इसमें देश का हित छिपा है। उन्होंने कहा कि देश पहले भी कई कठिन परिस्थितियों से गुजरा है और उस समय देशवासियों ने सरकार का साथ दिया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि संकट के समय देशहित सर्वोपरि होता है और जनता को सरकार के साथ खड़ा रहना चाहिए।वहीं दूसरी ओर किरयाना और अन्य कारोबार से जुड़े दुकानदारों ने इस अपील को लेकर चिंता भी जाहिर की है। व्यापारियों का कहना है कि यदि लोग खरीदारी कम करेंगे और खर्चों में कटौती करेंगे तो इसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। दुकानदारों के अनुसार पहले ही बाजार में मंदी का माहौल बना हुआ है और ऐसे में यदि लोग जरूरत की चीजों की खरीद भी कम कर देंगे तो छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।
कुछ दुकानदारों ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत जरूरी है, लेकिन आम आदमी के लिए रोजमर्रा के कामों में वाहन का इस्तेमाल करना मजबूरी भी है। कई लोगों को रोज दुकान, नौकरी या अन्य कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और हर जगह मेट्रो जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में लोगों के सामने व्यवहारिक दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
वर्क फ्रॉम होम को लेकर भी लोगों की राय अलग-अलग नजर आई। कुछ लोगों का कहना है कि घर से काम करना हर क्षेत्र में संभव नहीं है और लगातार घर में रहकर काम करने से मानसिक दबाव और अकेलेपन जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। वहीं कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के सुझावों को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि यदि देश किसी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है तो हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह सहयोग करे।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए कई फैसले पहले भी देशहित में साबित हुए हैं और इस बार भी जनता सरकार के साथ खड़ी है। हालांकि लोगों ने यह भी कहा कि सरकार को ऐसे विकल्पों पर भी काम करना चाहिए जिससे देशहित के साथ-साथ व्यापार और आम लोगों की जरूरतें भी प्रभावित न हों।