Summer express/गुरुग्राम, अनुज पांचाल -:मानसून सीजन से पहले हरियाणा सरकार ने बाढ़ जैसी आपात स्थितियों से निपटने की अपनी तैयारियों का व्यापक परीक्षण किया। गुरुग्राम समेत राज्य के 13 बाढ़ संभावित जिलों में सुबह ठीक 9 बजे सायरन बजते ही राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल शुरू की गई। इस दौरान प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान का लाइव प्रदर्शन किया।
गुरुग्राम में DLF फेज-1 अंडरपास, बसई तालाब और सिग्नेचर टावर अंडरपास को संवेदनशील हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया, जहां काल्पनिक बाढ़ की स्थिति बनाकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। मॉक ड्रिल का मुख्य संचालन ताऊ देवीलाल स्टेडियम से किया गया, जिसे अस्थायी ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर और स्टैजिंग एरिया बनाया गया था। वहीं सेक्टर-31 में राहत शिविर और इमरजेंसी सहायता केंद्र सक्रिय रखा गया।सुबह से ही स्टेडियम परिसर में राहत कार्यों में इस्तेमाल होने वाली एम्बुलेंस, बोट, जेसीबी मशीनें और अन्य आपदा राहत उपकरण तैनात किए गए। विभिन्न विभागों की टीमें तय समय पर मौके पर पहुंचीं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने तथा सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।प्रशासनिक अधिकारियों ने वायरलेस नेटवर्क और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार टीमों को दिशा-निर्देश जारी किए। पुलिस विभाग ने यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था संभाली, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रदर्शन किया। फायर विभाग ने जल निकासी और रेस्क्यू तकनीकों का अभ्यास किया। वहीं सिविल डिफेंस और आपदा मित्रों ने स्थानीय स्तर पर राहत कार्यों में सहयोग दिया।
अधिकारियों के अनुसार इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल संसाधनों की जांच करना नहीं था, बल्कि आपदा के दौरान विभागों के बीच त्वरित समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना भी था। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान किसी भी संभावित बाढ़ संकट से निपटने के लिए सभी एजेंसियां पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।