Summer express, करनाल। चर्चित बॉबी हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चंडीगढ़ पीजीआई से प्राप्त विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट के बाद मृतक के परिजनों और समाज के प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन तथा प्रारंभिक पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि शुरुआती रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे मामले की गंभीरता सामने नहीं आ सकी।
परिवार के सदस्यों ने दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्टों की तुलना करते हुए दावा किया कि पीजीआई की रिपोर्ट में शरीर के विभिन्न हिस्सों में कई फ्रैक्चर और गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर तैयार की गई पहली रिपोर्ट में इन चोटों का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं था। इसी कारण अब पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है।
परिजनों का कहना है कि यदि उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग नहीं की होती तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने ही नहीं आते। उनका आरोप है कि मृतक के साथ हुई कथित बर्बरता की वास्तविक तस्वीर अब पीजीआई की रिपोर्ट से उजागर हुई है।
मामले में एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पहले पोस्टमार्टम के बाद शव के सिर वाले हिस्से को चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप पूरी तरह बंद नहीं किया गया। परिजनों के अनुसार, इससे शव को चंडीगढ़ ले जाने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण जैविक साक्ष्य प्रभावित हुए, जिससे मेडिकल विशेषज्ञों को मौत के कारणों का विश्लेषण करने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
परिवार का दावा है कि पीजीआई में गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा शरीर पर कुछ ऐसे निशानों की भी पहचान की गई, जिनकी विस्तृत जांच आवश्यक है। परिजनों ने आशंका जताई है कि मृतक के शरीर पर गंभीर अंदरूनी चोटों के साथ अन्य संदिग्ध निशान भी पाए गए हैं, जिनकी पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगी।
इन खुलासों के बाद क्षेत्र में मामला फिर गरमा गया है। सामाजिक संगठनों और परिजनों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही या तथ्यों को नजरअंदाज करने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है, जबकि परिजन न्याय और पारदर्शी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।