Summer express, कोलकाता | पश्चिम बंगाल में रेलवे आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं को मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय ने राज्य में 61 रेल परियोजनाओं पर काम शुरू करने की घोषणा की है, जिन पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल नेटवर्क का विस्तार, यात्री सुविधाओं में सुधार और माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाना है।
राज्य सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पश्चिम बंगाल में रेलवे कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। इसके तहत 538 रेलवे फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रेल फाटकों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।
यात्री सुविधाओं को बढ़ाने के लिए राज्य के 102 रेलवे स्टेशनों को ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। वहीं, कोलकाता मेट्रो नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में 60 नए रेक शामिल किए जाएंगे।
रेल मंत्री ने उत्तर बंगाल को राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की भी घोषणा की। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन सेवा नई दिल्ली से लखनऊ, वाराणसी और पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक संचालित की जाएगी। इस परियोजना के पूरा होने पर लंबी दूरी की यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
इसके अलावा, राज्य में आगामी वर्षों में 60 नई ट्रेन सेवाएं शुरू करने की योजना है। औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए डंकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाले समर्पित ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम किया जाएगा।
बैठक के दौरान रेलवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए रेलवे बोर्ड और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
रेल मंत्रालय का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल में यात्री सुविधाओं, माल ढुलाई और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ होगा।