Summer express,नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर ठगी को अंजाम देता था। मामले की जांच के तहत सीबीआई ने 16 राज्यों में फैले 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
फर्जी सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट बनाकर रची ठगी
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक नकली वेबसाइट तैयार की थी। इसी वेबसाइट के जरिए आरोपी खुद को कानूनी अधिकार प्राप्त अधिकारी बताकर लोगों को डराते और उनसे धन उगाही करते थे। ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए फर्जी अदालत आदेशों और जांच एजेंसियों के नकली दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया जाता था।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की, जिसके दौरान इस बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा हुआ।
ऑपरेशन चक्र-VI के तहत देशव्यापी छापेमारी
गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से सीबीआई ने “ऑपरेशन चक्र-VI” शुरू किया। इसके लिए 60 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
दो आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों रुपये की हेराफेरी का खुलासा
कार्रवाई के दौरान चेन्नई से बी. नरेश और कोलकाता से संजीब साहा को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपी शेल कंपनियां बनाने और म्यूल बैंक खातों के संचालन में शामिल थे। इन खातों के माध्यम से अपराध से अर्जित करीब दो करोड़ रुपये की रकम को इधर-उधर किया गया।
विदेशों तक फैला था नेटवर्क
सीबीआई ने तकनीकी विश्लेषण और आधुनिक फोरेंसिक उपकरणों की मदद से इस साइबर नेटवर्क के पूरे ढांचे की पहचान की है। जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह की गतिविधियां केवल भारत तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इसके तार विदेशों तक जुड़े हुए थे। आरोपियों ने भारतीय नागरिकों के अलावा अन्य देशों के लोगों को भी अपना निशाना बनाया।
डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। सभी बरामद सामग्रियों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी सहयोग
विदेशी नागरिकों के ठगी का शिकार होने की आशंका को देखते हुए सीबीआई ने संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भी जानकारी साझा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान होने पर और गिरफ्तारियां हो सकती