Summer express, पटना/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मारे गए 28 वर्षीय छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने अपने बेटे की मौत के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरी घटना सार्वजनिक रूप से सामने आई और देशभर के लोगों ने देखा कि क्या हुआ, इसलिए मामले में पारदर्शी जांच आवश्यक है।
पत्रकारों से बातचीत में काशीनाथ तिवारी ने कहा कि उन्हें जांच के आश्वासनों पर भरोसा नहीं है और परिवार इस मामले में जवाबदेही चाहता है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष न्याय नहीं मिला तो परिवार के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना से जुड़े कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, जिनका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।
गौरतलब है कि भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी स्थानीय मुद्दों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सक्रिय रूप से आवाज उठाते रहे थे। वे विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और सरकारी सुविधाओं की कमी को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अभियान चलाते थे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनके कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें वे हथियार के साथ दिखाई दिए थे और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते नजर आए थे।
पुलिस के अनुसार, 16 जून को भरत भूषण तिवारी को मानसिक रूप से अस्थिर बताते हुए उन्हें हिरासत में लेकर उपचार के लिए भेजने की तैयारी की जा रही थी। पुलिस का दावा है कि 17 जून को कार्रवाई के दौरान तिवारी ने पुलिस टीम पर अवैध हथियार से कई राउंड फायरिंग की, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
हालांकि, घटना से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो ने मामले को नया मोड़ दे दिया। वीडियो में भरत भूषण तिवारी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण का संकेत देते हुए अपनी पिस्तौल दूर फेंकते दिखाई दे रहे हैं। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद भी उन्हें गोली मारी गई, जिससे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले ने राजनीतिक और कानूनी रूप से बड़ा रूप ले लिया है। जन आक्रोश और बढ़ते दबाव के बीच बिहार सरकार ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) समेत चार पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।