नई दिल्ली। भारतीय रेलवे और केंद्र सरकार ने आईआरसीटीसी (आईआरसीटीसी) के नाम पर चल रही फर्जी टिकट बुकिंग वेबसाइटों और साइबर ठगी को लेकर यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी आईआरसीटीसी जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें और सोशल मीडिया लिंक बनाकर लोगों को सस्ते टिकट, तत्काल (तत्काल) कन्फर्म सीट या विशेष ऑफर का लालच देते हैं। इन वेबसाइटों पर भुगतान करने के बाद या तो टिकट जारी नहीं होता या फिर यात्रियों की बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी साइबर ठगों के हाथ लग जाती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेल टिकट बुकिंग केवल आईआरसीटीसी के आधिकारिक पोर्टल और अधिकृत मोबाइल ऐप के माध्यम से ही करनी चाहिए। किसी भी अनजान लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन, व्हाट्सऐप संदेश या सर्च इंजन पर दिखने वाली संदिग्ध वेबसाइट पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी गई है। यदि किसी वेबसाइट के नाम, डोमेन या भुगतान प्रक्रिया पर संदेह हो तो पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
रेल मंत्रालय ने हाल के महीनों में ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। एंटी-बॉट तकनीक, संदिग्ध यूजर आईडी की पहचान, फर्जी खातों पर कार्रवाई और आधार सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं से टिकटों की कालाबाजारी और फर्जी बुकिंग पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में करोड़ों संदिग्ध या फर्जी आईआरसीटीसी यूजर आईडी को निष्क्रिय या सत्यापन के लिए चिह्नित किया गया, जिससे वास्तविक यात्रियों को टिकट लेने में मदद मिली।
{राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराएं शिकायत…
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों से अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध वेबसाइट, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी या सोशल मीडिया लिंक मिले तो उसकी जानकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराएं। ठगी होने की स्थिति में तुरंत शिकायत करने और बैंक को भी सूचित करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि छुट्टियों, त्योहारों और तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान ऐसे साइबर गिरोह सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं। इसलिए टिकट बुक करते समय वेबसाइट का वेब पता (यूआरएल), सुरक्षा चिह्न और आधिकारिक प्लेटफॉर्म की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी यात्रियों को आर्थिक नुकसान और साइबर धोखाधड़ी से बचा सकती है।