Summer express/शिमला, 3 जुलाई : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को पूर्व में एसजेवीएनएल को आवंटित 382 मेगावाट सुन्नी, 210 मेगावाट लुहरी चरण-1 तथा 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजनाओं के संबंध में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत प्रदेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और राज्य सरकार का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों से हिमाचल प्रदेश को अधिकतम लाभ दिलाना है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा तथा जलविद्युत संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए लगातार कार्य कर रही है।
बैठक में 500 मेगावाट डुग्गर जलविद्युत परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजना की संशोधित परिस्थितियों, विशेषकर बांध की प्रस्तावित ऊंचाई में वृद्धि के मद्देनजर, परियोजना की शर्तों एवं लाभों पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए ताकि राज्य के हित सुरक्षित रह सकें।मुख्यमंत्री ने बताया कि 422 मेगावाट किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान कर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार को परियोजना में पूंजी निवेश नहीं करना होगा, जबकि हिमाचल प्रदेश को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। इससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव (ऊर्जा) राकेश कंवर, निदेशक ऊर्जा राकेश प्रजापति, एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।