राजवीर बक्खी | लुधियाना
पिछले साल विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई के बाद जिस आरटीओ कार्यालय से एजेंटों का नेटवर्क लगभग खत्म हो गया था, वहां एक बार फिर एजेंटों की सक्रियता बढ़ने के आरोप सामने आए हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार एजेंटों ने काम करने का तरीका बदल दिया है।
पहले फाइलें सीधे कर्मचारियों तक पहुंचती थीं, अब केवल आवेदन (एप्लीकेशन) नंबर मोबाइल के जरिए संबंधित कर्मचारियों तक भेजे जाने और उसी आधार पर काम आगे बढ़ने की चर्चा है।
मोबाइल से हो रहा फाइलों का ‘मैनेजमेंट’, मिलीभगत की आशंका गहराई… कार्यालय में एजेंट-कर्मचारी गठजोड़ पर फिर उठे सवाल
कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहले एजेंट फाइलें लेकर सीधे कर्मचारियों तक पहुंचते थे। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद तरीका बदल दिया गया। अब एजेंट केवल आवेदन नंबर मोबाइल पर संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचा देते हैं और उसी के आधार पर फाइलों की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है। इससे कार्यालय के भीतर एजेंटों और कर्मचारियों के बीच संभावित मिलीभगत की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
कार्रवाई के बाद फिर पुराने हालात
पिछले वर्ष विजिलेंस ब्यूरो ने आरटीओ कार्यालय से जुड़े कई एजेंटों पर कार्रवाई की थी। जांच में सामने आया था कि कुछ एजेंट पैसे लेकर ड्राइविंग लाइसेंस पास करवाने और अन्य कार्य कराने का दावा करते थे। कार्रवाई के बाद कुछ समय तक एजेंटों की गतिविधियां लगभग थम गई थीं, लेकिन अब एक बार फिर एजेंटों की सक्रियता बढ़ने की चर्चाएं हैं। यदि कार्यालय में अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हैं, तो एजेंटों की लगातार मौजूदगी और रिकॉर्ड रूम तक उनकी कथित पहुंच कई सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि स्पष्ट हो सके कि एजेंटों की सक्रियता किसके संरक्षण में चल रही है।
सीसीटीवी की निगरानी, फिर भी बेखौफ आवाजाही
एजेंटों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पिछले साल कार्यालय परिसर में सीसीटीवी लगाए थे। इनकी लाइव मॉनिटरिंग अधिकारियों के कमरे से होने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद एजेंटों की लगातार मौजूदगी कई सवाल खड़े कर रही है।
रिकॉर्ड रूम तक पहुंच ने बढ़ाई चिंता
सूत्रों का दावा है कि एजेंटों को कई बार रिकॉर्ड रूम से दस्तावेज निकलवाते और सरकारी रिकॉर्ड तक पहुंच बनाते देखा गया है। इससे सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा और गोपनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बिना अंदरूनी सहयोग के किसी बाहरी व्यक्ति की रिकॉर्ड रूम तक पहुंच संभव नहीं हो सकती।
आरटीओ मनकवल सिंह चाहल ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित क्लर्कों से जानकारी ली जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो
नियमानुसार बनती कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।