सुनील शिंगार | लुधियाना
लुधियाना के दुगरी निवासी आर्यन गुप्ता ने NEET-UG (री-नीट) 2026 में 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) प्राप्त करते हुए देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। उनकी यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि एक भावुक संकल्प की कहानी भी है।
आर्यन ने बताया कि जब वह तीसरी कक्षा में थे, तब उनकी दादी का चौथी स्टेज के कैंसर के कारण निधन हो गया था। उस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि वह बड़े होकर कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) बनेंगे, ताकि भविष्य में किसी परिवार को इलाज के अभाव में अपनों को न खोना पड़े।
आर्यन के पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थीसियोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी माता डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं। डॉक्टर परिवार से होने के बावजूद दादी को नहीं बचा पाने का दर्द उनके मन में हमेशा रहा। उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी स्वर्गीय दादी की प्रेरणा और बड़े भाई के मार्गदर्शन को दिया।
उनके बड़े भाई ने NEET-2025 में ऑल इंडिया रैंक-54 हासिल की थी और वर्तमान में दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। आर्यन ने बताया कि तैयारी के दौरान भाई ने पढ़ाई की रणनीति बनाने, नोट्स तैयार करने और मानसिक दबाव से उबरने में हर कदम पर उनका साथ दिया।
आर्यन की सफलता का मूल मंत्र कॉन्सेप्ट आधारित पढ़ाई रही। उनका कहना है कि वह किसी भी विषय या प्रश्न को पूरी तरह समझे बिना आगे नहीं बढ़ते थे। उन्होंने दसवीं कक्षा में गणित में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और 12वीं में 97.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने पूरे समर्पण के साथ दो वर्षों तक NEET की तैयारी की।
पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने और दोबारा री-नीट आयोजित होने से मानसिक दबाव जरूर बना, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। दोबारा पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी और 715 अंक हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया।
दिलचस्प बात यह रही कि आर्यन ने तैयारी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या ChatGPT जैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों, क्लास नोट्स और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर भरोसा किया।
अब आर्यन देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगे। उनका लक्ष्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि कैंसर के क्षेत्र में शोध कर ऐसा उपचार विकसित करना है, जो हर वर्ग के लोगों के लिए सुलभ और किफायती हो। उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी या इलाज की कमी के कारण अपनी दादी की तरह अपनों को न खोए, यही उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।