शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से लगभग 400 वर्ष पुरानी दुर्लभ तोप चोरी होने से पुरातात्विक धरोहरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार बदमाश किले के पिछले हिस्से से पहुंचे और भारी-भरकम तोप को करीब 3,000 फीट नीचे उतारकर वाहन में ले गए। पुलिस को आशंका है कि वारदात में संगठित प्राचीन धरोहर तस्कर गिरोह शामिल हो सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक किले में पहले 14 ऐतिहासिक तोपें थीं, लेकिन इस चोरी के बाद अब केवल 13 तोपें बची हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार चोरी हुई तोप सिंधिया रियासत काल की मानी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी कीमत पांच करोड़ रुपये तक हो सकती है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज, संभावित रास्तों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
तस्करी के एंगल पर जांच
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय प्राचीन वस्तु तस्करी गिरोहों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा व्यवस्था और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी वारदात
नरवर किले से ऐतिहासिक तोप चोरी का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2007 में भी यहां से दो तोपें चोरी हुई थीं, जिनमें से एक बाद में बरामद कर ली गई थी, जबकि दूसरी का अब तक पता नहीं चल सका। ताजा घटना के बाद किले की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर फिर सवाल उठने लगे हैं।