Summer express/मंडी,धर्मवीर-:देश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाली छोटी काशी मंडी से एक बार फिर पहाड़ी बोली के संरक्षण और संर्वधन की मांग उठी है। सोमवार को शहर में आयोजित हुए पहाड़ी कवि सम्मेलन के माध्यम से पहाड़ी कवियों ने इसके संरक्षण और संवर्धन की मांग उठाई है। इस कवि सम्मेलन में कुल्लू, मंडी और बिलासपुर जिला के 40 रचनाकारों ने भाग लिया और अपनी कविताओं के माध्यम से खूब समा बांधा। कवि सम्मेलन में नगर निगम की महापौर सुमन ठाकुर व उपमहापौर जितेंद्र शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे।
इस मौके उन्होंने साहित्यकार प्रकाश चंद धीमान द्वार रचित “बागर” पहाड़ी तिमाही पत्रिका का पुनरारंभ करने के साथ डॉ जगदीश कपूर और कृष्ण चंद महादेविया द्वारा रचित “एक था भाट व अन्य लोककथाएं” पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर पहाड़ी कवियों ने मीडिया के माध्यम से देश व प्रदेश की सरकारों से हिमाचल की पहाड़ी बोलियों के सरंक्षण व संवर्धन की मांग भी रखी। साहित्यकार प्रकाश चंद धीमान ने कहा कि पहाड़ी बोली में लाखों ऐसी रचानाएं है जो चरित्र का भी निमार्ण करती हैं। ऐसे में हिमाचली पहाड़ी बोली को सविधान की आठवीं सूचि में स्थान दिया जाए, जिससे अन्य प्रदेशों की जनता भी इसका लाभ ले सके। साहित्सकार डॉ जगदीश कपूर ने सरकार से पहाड़ी रचानाओं को हिंदी में भी अनुवाद करने की मांग उठाई है। वहीं कई दशकों से पहाड़ी विधाओं की रचनाओं को संग्रहित कर रहे साहित्यकार कृष्ण चंद महादेविया ने कहा कि पहाड़ी बोलियों में ऐसी कई रचनाएं हैं जिन्हें अभी तक संग्रहित नहीं किया जा सका है। उन्होंने भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के साथ सरकारों से भी इनके संरक्षण की मांग उठाई है।