Summer express, अंकुर कपूर, अम्बाला छावनी | अम्बाला छावनी की राजनीति में बुधवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जिसने स्थानीय सियासी फिज़ा में नई हलचल पैदा कर दी। वार्ड नंबर-5 से निर्वाचित आज़ाद पार्षद जीवन कुमार ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ हरियाणा की युवा नेत्री एवं टीम चित्रा की संस्थापक चित्रा सरवारा के नेतृत्व में अपनी राजनीतिक आस्था व्यक्त करते हुए उनके निवास पर पहुंचकर उनका दामन थाम लिया। इस अवसर जीवन के साथ साथ सरदार जसविंदर सिंह, अरुण गर्ग, सुशील राणा, सुशील यूनिफॉर्म, प्रसाद यादव, पंडित श्याम लाल, हरमिंदर सिंह, करनैल सिंह, मनोज कुमार झाम्ब, संजय सिसौदिया, विजय सिसौदिया, विक्की सिसौदिया, प्रवीन लाम्बा, दीपक राणा, राहुल, नीरज, चीनू बब्याल सहित अनेकों साथियों ने भी टीम चित्रा की सदस्यता ग्रहण की।
इस अवसर पर पार्षद संदीप दीपी, राहुल सोनकर वीरू,बीएलए-1 विशेष धीमान,अजय पहलवान, कुशलपाल राणा,आशीष शर्मा सहित टीम चित्रा के सदस्यों ने जीवन कुमार एवं उनके साथियों का स्वागत किया। चित्रा सरवारा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। उन्हें पूरा विश्वास है कि यह परिवार आगे भी निरंतर बढ़ेगा और पूरी निष्ठा से जनता की सेवा करता रहेगा।इस अवसर पर चित्रा सरवारा व अन्य साथियों ने पार्षद जीवन कुमार का फूल मालाओं के साथ अपने परिवार में स्वागत भी किया।
वार्ड नंबर-5 के पार्षद जीवन कुमार ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र और शहर की जनता की पीड़ा तथा लंबे मंथन के बाद लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में पक्षपात, भेदभाव, भाई-भतीजावाद और दमनकारी कार्यशैली ने लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी चोट पहुंचाई है। उनका कहना था कि नगर परिषद आम जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरने में विफल रही है तथा वार्ड नंबर-5 सहित अनेक क्षेत्रों को विकास के नाम पर लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की घोषणाओं के बावजूद धरातल पर अपेक्षित विकास दिखाई नहीं देता और जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
जीवन कुमार ने कहा कि आज लोग केवल वादों से नहीं, बल्कि जवाबदेह नेतृत्व की तलाश में हैं। उनके अनुसार चित्रा सरवारा ने लगातार जनता के मुद्दों को सड़क से लेकर प्रशासन तक मजबूती से उठाया है और यही विश्वास उन्हें तथा उनके साथियों को उनके साथ जोड़कर लाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चित्रा सरवारा के नेतृत्व में पूरी टीम शहर के विकास, पारदर्शिता, जनभागीदारी और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। उनका दावा था कि शहर में सत्ता के प्रति बढ़ती नाराज़गी अब खुलकर सामने आने लगी है और लोग परिवर्तन के विकल्प की ओर देख रहे हैं।
चित्रा सरवारा ने अपने संबोधन में कहा कि जनता अब नारों, विज्ञापनों और घोषणाओं की राजनीति से आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च करने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन शहर की टूटी सड़कें, जलभराव, चरमराई सीवरेज व्यवस्था, पेयजल संकट और अव्यवस्थित नागरिक सुविधाएं आज भी लोगों की रोजमर्रा की हकीकत बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान शहर की स्थिति स्वयं इस बात का प्रमाण है कि विकास के दावों और ज़मीनी सच्चाई के बीच कितना बड़ा अंतर है।
उन्होंने कहा कि महंगाई ने आम परिवार की कमर तोड़ दी है, किसान अपनी फसल और भविष्य को लेकर चिंतित है, मजदूर और गरीब वर्ग लगातार आर्थिक दबाव झेल रहा है, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं तथा युवाओं के सामने बेरोज़गारी और नशे जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर उठे विवादों ने भी युवाओं के विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाई है। उनका कहना था कि जनता अब ऐसी राजनीति चाहती है जो केवल प्रचार नहीं, बल्कि परिणाम दे।
चित्रा सरवारा ने कहा कि पिछला चुनाव उनके लिए केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि जनता के अपार विश्वास और स्नेह का प्रमाण था। उन्होंने कहा कि अम्बाला छावनी की जनता ने उन्हें जिस प्रेम और समर्थन से नवाज़ा, उसके लिए वह सदैव आभारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में जनता उन्हें सेवा का अवसर देती है तो उनकी प्राथमिकता पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेह व्यवस्था, ईमानदार कार्यशैली और बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक वार्ड तक समान विकास पहुंचाना होगी। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि कार्यशैली और राजनीतिक संस्कृति में बदलाव लाना है, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनता का बढ़ता समर्थन इस बात का संकेत है कि अम्बाला छावनी में परिवर्तन की इच्छा अब जनभावना का रूप ले चुकी है और आने वाले समय में यही जनविश्वास शहर की नई राजनीतिक दिशा तय करेगा।