समर न्यूज | अमृतसर
पंजाब सरकार ने बेअदबी से संबंधित नए कानून को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बाद संशोधित मसौदा सौंप दिया है। सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर सिख धार्मिक संस्थाओं और सरकार के बीच मतभेद सामने आए थे।
संशोधित मसौदे में अकाल तख्त की ओर से सुझाए गए बदलावों को शामिल किए जाने का दावा किया गया है। सरकार के इस कदम के बाद अब कानून में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मामला पंजाब सरकार के जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 से जुड़ा है। कानून को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी।
उनका कहना था कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता और सत्कार से जुड़े कानून को तैयार करने में सिख धार्मिक संस्थाओं और पंथक भावनाओं को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए था। इसके बाद सरकार को कानून में जरूरी बदलाव करने के लिए समय दिया गया था। सरकार ने इससे पहले अकाल तख्त की ओर से दिए गए सुझावों पर पंजाब के महाधिवक्ता से कानूनी राय भी मांगी थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर एसजीपीसी से भी विचार-विमर्श कर रही है। अकाल तख्त की ओर से कानून की पांच धाराओं में कम से कम 10 बदलाव सुझाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
निज्जर ने बताईं आपत्तियां दूर करने की बात
आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने कहा कि संशोधित मसौदे में अकाल तख्त की ओर से उठाई गई आपत्तियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। उनका कहना है कि सरकार ने धार्मिक भावनाओं और कानून की व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
विधानसभा में संशोधन पर नजर
पंजाब सरकार ने संकेत दिया है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कानून में आवश्यक संशोधन विधानसभा के आगामी सत्र में लाए जा सकते हैं। विधानसभा का मानसून सत्र तीन अगस्त से शुरू होने का कार्यक्रम है। अब नजर इस बात पर है कि संशोधित मसौदे को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब और अन्य सिख संस्थाओं की अंतिम प्रतिक्रिया क्या रहती है। विवाद का केंद्र कानून के वे प्रावधान हैं, जिन पर धार्मिक अधिकार क्षेत्र और कानून के दायरे को लेकर सवाल उठाए गए हैं।