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रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतें, लेकिन सुविधाएं गायब

समर न्यूज | मोहाली

चंडीगढ़ और उसके आसपास का इलाका पिछले कुछ वर्षों में उत्तर भारत के प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में बदल गया है। चंडीगढ़ में जमीन की सीमित उपलब्धता, मोहाली में नए सेक्टरों का विस्तार, न्यू चंडीगढ़ में बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट, जीरकपुर-डेराबस्सी में राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी कनेक्टिविटी और खरड़ क्षेत्र में तेजी से बढ़ती आवासीय कॉलोनियों ने संपत्ति की कीमतों को लगातार ऊपर धकेला है। लेकिन इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है- क्या इन इलाकों में नागरिक सुविधाओं का विकास उसी अनुपात में हुआ है?
कई इलाकों में मकान, फ्लैट और प्लॉट की कीमतें आम मध्यमवर्गीय परिवार की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। दूसरी ओर, बारिश के दौरान जलभराव, टूटी या खुदी सड़कें, सीवर ओवरफ्लो, कूड़ा प्रबंधन, पार्किंग की कमी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं बताती हैं कि शहरीकरण की रफ्तार और बुनियादी ढांचे के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। हालिया बारिश ने एक बार फिर मोहाली, जीरकपुर और खरड़ सहित पूरे क्षेत्र में जल निकासी और यातायात व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया।
चंडीगढ़ में जमीन की कमी और सीमित विस्तार क्षेत्र के कारण संपत्ति लंबे समय से प्रीमियम पर रही है। अब इसके आसपास के क्षेत्रों में भी चंडीगढ़ से निकटता को कीमत बढ़ाने का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। संपत्ति बाजार के ऑनलाइन आंकड़ों में चंडीगढ़ और न्यू चंडीगढ़ के बीच कीमतों में स्पष्ट अंतर दिखता है, लेकिन न्यू चंडीगढ़ और मोहाली के विकसित हिस्सों में भी अच्छे स्थानों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कई प्रीमियम टाउनशिप और विकसित सेक्टरों में प्लॉट की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है।
समस्या यह है कि खरीदार केवल जमीन या फ्लैट नहीं खरीदता। वह सड़क, पानी, सीवर, बिजली, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, अस्पताल और सुरक्षित वातावरण के लिए भी भुगतान करता है। ऐसे में जब किसी नए आवासीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार बस जाते हैं, लेकिन आसपास की सड़कें संकरी रहती हैं या सीवर और बारिश के पानी की निकासी की क्षमता आबादी के अनुरूप नहीं होती, तो संपत्ति की वास्तविक उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। चंडीगढ़ का उदाहरण भी इसी विरोधाभास को सामने लाता है। शहर की योजनाबद्ध पहचान और अपेक्षाकृत बेहतर नागरिक सेवाओं के बावजूद बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, पार्किंग की कमी और यातायात दबाव को लेकर चिंता बढ़ रही है।
शहर के मास्टर प्लान में बदलाव और अधिक घनत्व वाले विकास की चर्चा के बीच विशेषज्ञों और नागरिक समूहों का सवाल है कि पानी, सीवर, सड़क और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं बढ़ती आबादी का दबाव कैसे संभालेंगी।

{मोहाली: योजनाबद्ध विकास के साथ दबाव: मोहाली में फेज और सेक्टर आधारित पुराने नियोजित क्षेत्रों के बाद शहर का विस्तार एयरपोर्ट रोड, आईटी सिटी, एयरोसिटी और आसपास के नए सेक्टरों तक हो चुका है। यहां कई इलाकों में सड़क, बिजली, पानी और सीवर की सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर हैं, लेकिन तेजी से बढ़ते निर्माण ने यातायात और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर दबाव भी बढ़ाया है। मोहाली नगर निगम ने पानी, सीवर, सफाई, सड़क और अन्य नागरिक कार्यों पर करोड़ों रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन समस्या को पहचान रहा है और निवेश भी कर रहा है। मगर नागरिकों की शिकायत यह है कि कई बार नई कॉलोनियां और आवासीय परियोजनाएं आबाद होने की गति, सड़कों और सीवर जैसी सुविधाओं के विस्तार से तेज हो जाती हैं।
खरड़-लांडरां सड़क इसका उदाहरण है। सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क खोदे जाने के बाद लंबे समय तक इसकी स्थिति को लेकर लोगों ने शिकायतें कीं। प्रशासन ने सड़क बहाली और सीवर परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, लेकिन इस तरह की परियोजनाओं में एक विभाग का काम पूरा होने से पहले दूसरे काम शुरू होने या सड़क बहाली में देरी से रोजाना आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है।
खरड़ की समस्या केवल सड़क तक सीमित नहीं है। चंडीगढ़ और मोहाली से निकटता के कारण यहां बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं विकसित हुई हैं। लेकिन बढ़ती आबादी के मुकाबले मुख्य मार्गों की क्षमता, सार्वजनिक परिवहन और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। मानसून के दौरान जलभराव और ट्रैफिक जाम इस अंतर को और स्पष्ट कर देते हैं।
{जीरकपुर-ढकोली: कनेक्टिविटी बनी चुनौती: जीरकपुर की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। यह चंडीगढ़, पंचकूला, अंबाला, पटियाला और दिल्ली की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों के बीच स्थित है। इसी कनेक्टिविटी ने यहां रियल एस्टेट को तेजी से बढ़ावा दिया। अपार्टमेंट, हाई-राइज सोसायटियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार तेजी से बढ़े। लेकिन शहर की सड़क और जल निकासी व्यवस्था पर इसी विकास का दबाव भी दिखाई देता है। सिंहपुरा चौक, पटियाला चौक, वीआईपी रोड, ढकोली और पीरमुच्छल्ला जैसे क्षेत्रों में बारिश के दौरान जलभराव और ट्रैफिक की समस्या कई बार गंभीर रूप ले चुकी है। हालिया मानसून में भी जीरकपुर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद सड़कें जलमग्न होने और यातायात प्रभावित होने की घटनाएं सामने आईं। ढकोली और पीरमुच्छल्ला में जल निकासी की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन का ध्यान खींचा है। ढकोली रेलवे क्रॉसिंग भी लंबे समय से यातायात की समस्या का केंद्र रहा है। इसके बंद होने पर लोगों को बेहद लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है। ऐसे में जिस क्षेत्र में हजारों परिवार रह रहे हों, वहां एक महत्वपूर्ण रेलवे क्रॉसिंग का स्थायी समाधान नहीं होना शहरी नियोजन की चुनौती को दिखाता है। जीरकपुर में एक और बड़ा सवाल यह है कि संपत्ति से मिलने वाले राजस्व और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन कितना है। नगर परिषद को संपत्ति कर से अच्छी आय होने के बावजूद सड़क, स्ट्रीट लाइट, पानी, बिजली और जल निकासी जैसी समस्याओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासन की ओर से सड़क और ड्रेनेज सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के मुकाबले इनकी गति पर्याप्त है या नहीं, यह बहस जारी है।
{डेराबस्सी: आसपास का दबाव: डेराबस्सी क्षेत्र भी औद्योगिक गतिविधियों और चंडीगढ़ से कनेक्टिविटी के कारण तेजी से विकसित हुआ है। यहां आवासीय विस्तार के साथ औद्योगिक क्षेत्रों का दबाव भी है। बारिश के दौरान जलभराव और यातायात की समस्या कई स्थानों पर सामने आती है। इसका एक कारण यह भी है कि शहरी विस्तार अक्सर पुराने गांवों और कृषि भूमि के आसपास हुआ है, जहां पहले की आबादी के लिए बनी सड़क और जल निकासी व्यवस्था अचानक कई गुना आबादी का भार उठाने लगती है। यही स्थिति जीरकपुर, ढकोली, खरड़ और मोहाली के बाहरी हिस्सों में भी दिखाई देती है। नई सोसायटियां अपनी आंतरिक सड़कें और सुविधाएं विकसित कर लेती हैं, लेकिन उनके बाहर की मुख्य सड़क, सार्वजनिक परिवहन, सीवर या ड्रेनेज किसी दूसरे विभाग के
जिम्मे होते हैं।
नतीजा यह होता है कि परियोजना के भीतर रहने की सुविधा अच्छी दिखती है, लेकिन बाहर निकलते ही समस्याएं सामने आ जाती हैं।
{न्यू चंडीगढ़: भविष्य की बड़ी योजना, आज की बड़ी जिम्मेदारी: न्यू चंडीगढ़ को क्षेत्र के भविष्य के प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ग्रेटर मोहाली क्षेत्र और न्यू चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर शहरी विस्तार की योजनाएं हैं। प्रशासन की योजनाओं में चौड़ी सड़कों, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास का प्रावधान है। एक प्रमुख 200 फुट चौड़ी सड़क और नए संपर्क मार्गों सहित कई परियोजनाएं प्रस्तावित या निर्माणाधीन हैं, लेकिन यहां भी चुनौती यही है कि शहरीकरण से पहले बुनियादी सुविधाएं कितनी तेजी से तैयार होती हैं। बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और नई टाउनशिप के विस्तार के बीच ग्रामीण आबादी को भी विकास का लाभ देने की मांग उठी है। सरकार ने प्रभावित गांवों में सड़क, पानी और सीवर व्यवस्था को नए शहरी ढांचे से जोड़ने की दिशा में पहल की है।

समस्या केवल कीमत की नहीं, नियोजन की है…

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार किसी संपत्ति की कीमत काे भविष्य की विकास योजनाएं और निवेश की मांग भी कीमत को प्रभावित करती हैं। चंडीगढ़ की सीमित भूमि, मोहाली का आईटी और औद्योगिक विस्तार तथा न्यू चंडीगढ़ की भविष्य की संभावनाएं स्वाभाविक रूप से कीमतों को ऊपर ले जाती हैं। दूसरी ओर, यदि किसी इलाके में करोड़ों रुपये की संपत्तियां बिक रही हैं, लेकिन निवासी रोजाना ट्रैफिक जाम, जलभराव या सीवर की समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह विकास मॉडल की कमजोरी है। सोशल मीडिया पर स्थानीय निवासियों की शिकायतों में भी यही सवाल बार-बार सामने आता है कि नई टाउनशिप और सोसायटियां तो तेजी से बन रही हैं, लेकिन उनके आसपास की सार्वजनिक सुविधाएं उसी गति से क्यों नहीं बढ़ रहीं।

जिम्मेदारी किसकी?…

इस पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय है। चंडीगढ़ में नगर निगम और प्रशासन, मोहाली में नगर निगम और ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण, जीरकपुर में नगर परिषद, खरड़ में नगर परिषद और राज्य की विभिन्न एजेंसियां तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भूमिका है। जब सड़क एक एजेंसी की, सीवर दूसरी की और ड्रेनेज तीसरी की जिम्मेदारी में हो, तो किसी समस्या का स्थायी समाधान अक्सर लंबा खिंच जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार नए निर्माण की अनुमति देने से पहले क्षेत्र की वहन क्षमता का आकलाकों में भी जनसंख्या और वाहनों की वृद्धि के हिसाब से बुनियादी ढांचे को लगातार अपग्रेड करना जरूरी है। अंततः ट्राइसिटी और उससे सटे पंजाब के तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतें अपने आप में समस्या नहीं हैं। असली सवाल यह है कि संपत्ति के मूल्य और सार्वजनिक सुविधाओं के बीच संतुलन कैसे कायम हो। यदि नागरिकों से महंगी संपत्ति और नियमित करों के रूप में अधिक भुगतान लिया जा रहा है, तो उन्हें बेहतर सड़क, भरोसेमंद पानी, प्रभावी सीवर और ड्रेनेज, सुचारु यातायात तथा साफ-सुथरा वातावरण भी मिलना चाहिए। आने वाले वर्षों में न्यू चंडीगढ़ और ग्रेटर मोहाली का विस्तार इस क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है, लेकिन यह बदलाव तभी टिकाऊ होगा जब शहरी विकास की रफ्तार नागरिक सुविधाओं से आगे नहीं, बल्कि उनके साथ-साथ चले।

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