Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। अंबाला जिले में इस बार मानसून की कमजोर गतिविधियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सामान्य तौर पर जून के मध्य से शुरू होने वाली अच्छी बारिश इस वर्ष अब तक नहीं हो सकी है। जून और जुलाई दोनों महीने लगभग सूखे गुजरने से खेतों में खड़ी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बारिश की कमी के चलते किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, लेकिन लगातार पड़ रही भीषण गर्मी, लो-वोल्टेज और बिजली कटौती उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।
किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर धान समेत अन्य फसलों की बुवाई की थी और कई किसानों ने सीधी बिजाई तकनीक भी अपनाई, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण फसलों में नमी की कमी हो रही है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और कई जगह फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान लगातार ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई कर फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति की अनियमितता उनके प्रयासों पर पानी फेर रही है। कई किसानों का कहना है कि कम वोल्टेज और बार-बार बिजली कटने के कारण ट्यूबवेल ठीक से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। ऐसे में खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों की चिंता भी गहराती जा रही है।
इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक जसविंदर सैनी ने बताया कि हरियाणा में अधिकांश कृषि भूमि की सिंचाई ट्यूबवेल के माध्यम से होती है, इसलिए अन्य राज्यों की तुलना में सूखे का प्रभाव अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रहा है। उन्होंने किसानों को पानी की कम खपत वाली फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धान की सीधी बिजाई को बढ़ावा दिया जा रहा है और किसानों को बाजरा, दलहन तथा तिलहन जैसी फसलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जसविंदर सैनी ने बताया कि सरकार इन वैकल्पिक फसलों पर किसानों को प्रति एकड़ 8 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने किसानों से मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की अपील की, ताकि उत्पादन और आय दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
मानसून की बेरुखी के बीच अंबाला के किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जिले में खरीफ फसलों पर संकट और गहरा सकता है।