गुवाहाटी | असम सरकार ने हाल ही में राज्य हित में दो बड़े निर्णय लिए हैं, जिनका असर स्वास्थ्य सेवाओं और वन्यजीव संरक्षण पर व्यापक रूप से दिखाई देगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन फैसलों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि निजी नर्सिंग होम्स की मनमानी रोकने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, वहीं ‘गज मित्र योजना’ के ज़रिए राज्य में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
अब नहीं चलेगी निजी नर्सिंग होम्स की मनमानी, बनेगा एसओपी
कैबिनेट ने स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए निजी नर्सिंग होम्स पर सख्त निगरानी रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि निजी अस्पतालों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और नियामक दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं, जिससे अब अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।
यदि किसी मरीज के साथ जबरदस्ती या संदिग्ध गतिविधि होती है, तो उसे चार घंटे के भीतर पुलिस और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना देना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक शोषण से बचाने के उद्देश्य से की गई है।
‘गज मित्र योजना’ से थमेगा मानव-हाथी टकराव
राज्य में हाथियों और इंसानों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे दोनों को नुकसान हो रहा है। इसे देखते हुए कैबिनेट ने ‘गज मित्र योजना’ को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य है कि हाथियों के प्राकृतिक आवास और मानव बस्तियों के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, जिससे टकराव की घटनाएं कम हों।
यह योजना गोलपारा, उदलगुरी, नागांव, बक्सा, सोनितपुर, गोलाघाट, जोरहाट और विश्वनाथ जैसे आठ ज़िलों में लागू होगी, जो हाथी संघर्ष से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। इस पहल में स्थानीय समुदाय की भागीदारी, जागरूकता कार्यक्रम और फील्ड में तैनात त्वरित प्रतिक्रिया टीमें शामिल होंगी।
इन दोनों फैसलों को राज्य सरकार द्वारा आम जनता की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक संतुलित और दूरदर्शी प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।