वॉशिंगटन | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी उस विवादित आदेश पर अदालत ने रोक लगा दी है, जिसमें कुछ नवजात शिशुओं को जन्म के बाद अमेरिकी नागरिकता देने से इनकार किया गया था। न्यू हैम्पशायर के संघीय न्यायाधीश जोसेफ लैप्लांटे ने यह फैसला 27 जुलाई से पहले सुनाया, जब यह नियम प्रभावी होने वाला था।
ट्रंप का आदेश क्या था?
20 जनवरी 2025 को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी किया था, जिसके तहत अवैध प्रवासियों या अस्थायी वीजा धारकों (जैसे टूरिस्ट या स्टूडेंट वीजा पर रहने वाले) के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं देने का प्रावधान किया गया था।
इस आदेश में उन्होंने अमेरिका के संविधान के 14वें संशोधन में उल्लिखित “subject to the jurisdiction thereof” वाक्य की नई व्याख्या करते हुए कहा कि यह नवजात उनपर लागू नहीं होता।
कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायाधीश लैप्लांटे ने आदेश को “गंभीर नुकसानदायक” बताते हुए रोक लगा दी। उन्होंने अमेरिकी नागरिकता को “दुनिया का सबसे बड़ा विशेषाधिकार” बताया और आदेश के खिलाफ 7 दिन की अंतरिम राहत देते हुए ट्रंप प्रशासन को अपील का मौका दिया।
ACLU की याचिका और क्लास एक्शन का फायदा
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को देशभर में कोई कानून लागू होने से रोकने वाले nationwide injunctions देने से मना किया था। लेकिन class action lawsuits की अनुमति बरकरार रखी गई थी। इसका लाभ उठाते हुए अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने एक क्लास एक्शन याचिका दायर की।
यह याचिका उन 1.5 लाख से अधिक बच्चों के हितों को लेकर थी, जो हर साल अमेरिका में जन्म लेते हैं और जिनका नागरिकता पाने का हक इस आदेश से प्रभावित होता।
सरकार की आपत्ति और अदालत का तर्क
न्याय विभाग ने तर्क दिया कि हर परिवार की परिस्थितियाँ अलग हैं, इसलिए यह मामला क्लास एक्शन नहीं बनता। लेकिन जज लैप्लांटे ने इसे “अत्यधिक जरूरी मामला” बताते हुए कहा कि इस स्तर पर लंबी जांच (Discovery) की जरूरत नहीं है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यायाधीश लैप्लांटे की नियुक्ति एक रिपब्लिकन राष्ट्रपति द्वारा की गई थी, फिर भी उन्होंने ट्रंप के आदेश के खिलाफ फैसला सुनाया।