Summer express , पंचकूला | जिले के पिंजौर क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। गांव खोलमोला के पास आर-71 सी-9 जंगल में वन विभाग की टीम को देखकर कथित लकड़ी तस्करों का गिरोह अपनी कार छोड़कर फरार हो गया। वन विभाग की जांच में जंगल से 34 खैर के पेड़ कटे हुए मिले हैं। मामले में वन रेंज अधिकारी कालका की शिकायत पर थाना पिंजौर में केस दर्ज किया गया है।
वन विभाग को सूचना मिली थी कि कौना लिंक रोड के पास जंगल में गोल्डन रंग की सेंट्रो कार संदिग्ध परिस्थितियों में खड़ी है। सूचना के आधार पर वन दरोगा सुमित सिंह, नानकपुर ब्लॉक इंचार्ज और बीट इंचार्ज वन रक्षक सचिन टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम को देखते ही कार सवार व्यक्ति अंधेरे का फायदा उठाकर वाहन को तेज रफ्तार से भगाकर ले गया।
इसके बाद वन कर्मचारियों ने आसपास के जंगल में तलाशी अभियान चलाया। टीम को कुछ लोगों के भागने की आवाजें भी सुनाई दीं, लेकिन अंधेरा अधिक होने के कारण किसी को पकड़ा नहीं जा सका। तलाशी के दौरान सड़क से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर अंदर जंगल में 26 खैर के पेड़ कटे हुए मिले। जंगल के दूसरे हिस्से में आठ और पेड़ काटे गए थे।
वन विभाग के अनुसार, तस्करों ने पेड़ों को काटकर उनके लट्ठे तैयार किए थे। कुछ लट्ठे जंगल के अंदर पड़े मिले, जबकि कुछ को सड़क के नजदीक तक लाया गया था। विभाग ने बताया कि अवैध कटाई को लेकर पहले ही फॉरेस्ट ऑफेंस रिपोर्ट (FOR) दर्ज की जा चुकी थी और मामले की जांच चल रही थी।
जांच के दौरान संदिग्ध सेंट्रो कार के संबंध में वन विभाग को मुखबिर से जानकारी मिली। इसके आधार पर कार के इस्तेमाल से जुड़े मैहदा पुत्र बरकत निवासी नगली का नाम सामने आया। आरोप है कि मैहदा ने दिहाड़ी पर लोगों को लगाकर जंगल में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई करवाई।
वन विभाग ने शिकायत में स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जताई है। अधिकारियों का कहना है कि जंगल के भीतर जाकर बड़ी संख्या में पेड़ काटना, उन्हें लट्ठों में बदलना और फिर बाहर निकालना स्थानीय सहयोग के बिना आसान नहीं है। इसी कड़ी में जंगल की निगरानी के लिए तैनात राखा (वॉचमैन) बाबू राम पुत्र हरी राम निवासी कौना की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। विभाग उसकी संभावित संलिप्तता की जांच कर रहा है।
वन विभाग ने पुलिस से संदिग्धों की कॉल डिटेल निकलवाने का भी अनुरोध किया है। अधिकारियों का मानना है कि कॉल डिटेल के जरिए आरोपियों के आपसी संपर्क और अवैध कटाई से जुड़े नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्धों के खिलाफ पहले से अवैध कटाई के मामले दर्ज हैं और संबंधित मामले अदालत में विचाराधीन हैं। वन विभाग के अनुसार, इस गिरोह पर पिंजौर के साथ-साथ एचएमटी, आसरेवाली, छछरौली और कलेसर के जंगलों में भी अवैध कटाई करने के आरोप हैं। पुलिस और वन विभाग अब मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका का पता लगाने में जुटे हैं।