Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़ I जम्मू-कश्मीर के पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के मंच पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण बजाए जाने पर कांग्रेस की आपत्ति को भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ प्रदेश के मीडिया प्रभारी रवि रावत ने कांग्रेस की घटिया मानसिकता, दोहरे चरित्र और वोट बैंक की राजनीति का शर्मनाक उदाहरण बताया है।
रवि रावत ने कहा कि कांग्रेस की आपत्ति पर उसे किसी भाजपा नेता ने नहीं, बल्कि उसके सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक तनवीर सादिक ने ही ऐसा आईना दिखाया है, जिससे कांग्रेस का चेहरा बेनकाब हो गया है। तनवीर सादिक ने साफ कहा कि कांग्रेस को पहले अपने मुख्यमंत्रियों को देखना चाहिए और उसके बाद अपने “बहुमूल्य विचार” देश के सामने रखने चाहिए। उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासित कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी पूरा ‘वंदे मातरम्’ बजा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस का दोहरे मापदंड वाला चेहरा सामने आता है। एक तरफ कांग्रेस के मुख्यमंत्री ‘वंदे मातरम्’ बजाते हैं और दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में इसी राष्ट्रगीत को लेकर कांग्रेस के नेता आपत्ति जताते हैं। रवि रावत ने कहा कि कांग्रेस आखिर किसे खुश करने के लिए ‘वंदे मातरम्’ का विरोध कर रही है? देश की जनता कांग्रेस से इस दोहरे रवैये का जवाब चाहती है।
रवि रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा तनवीर सादिक के बयान को एक्स पर साझा किया जाना कांग्रेस के लिए और भी बड़ी राजनीतिक फजीहत है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के सहयोगी और उसके अपने राज्यों के मुख्यमंत्री ‘वंदे मातरम्’ को सम्मान दे रहे हैं, तब कांग्रेस के कुछ नेता इसका विरोध कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर ही राष्ट्रगीत को लेकर कोई स्पष्ट नीति और नैतिकता नहीं बची है।
उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ कोई चुनावी नारा नहीं है, न ही यह किसी राजनीतिक दल की जागीर है। यह उस भारत की आत्मा की आवाज है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी की बेड़ियां तोड़ने का संकल्प लिया था। लाखों देशवासियों ने ‘वंदे मातरम्’ को अपने संघर्ष का उद्घोष बनाया और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी भावना के साथ अंग्रेजों के अत्याचारों का सामना किया।
रवि रावत ने कहा कि जिस ‘वंदे मातरम्’ ने गुलाम भारत में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित की, आज उसी के नाम से कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक बेचैनी समझ से परे है। कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उसे राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण से आखिर परेशानी क्या है?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि देश की जनता उसकी इस राजनीति को समझ नहीं रही। देश अब कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति को पहचान चुका है। कभी राष्ट्रवाद पर सवाल, कभी राष्ट्रीय प्रतीकों पर विवाद और कभी देश की एकता से जुड़े मुद्दों पर राजनीति—कांग्रेस की यह पुरानी राजनीति अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
रवि रावत ने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम्’ गाने से घबराते हैं, उन्हें उन शहीदों के इतिहास को पढ़ना चाहिए जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज देश स्वतंत्र है तो उन वीरों के कारण, जिन्होंने भारत माता की जय और ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष के साथ अंग्रेजों के दमन का सामना किया।
उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत पर राजनीति बंद करे, अपने दोहरे मापदंड छोड़े और पहले अपने ही मुख्यमंत्रियों तथा सहयोगी दलों के नेताओं से पूछे कि वे ‘वंदे मातरम्’ क्यों बजा रहे हैं।
रवि रावत ने कहा कि भारत माता के सम्मान और राष्ट्रभावना पर कांग्रेस की सुविधा की राजनीति नहीं चलेगी। ‘वंदे मातरम्’ करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और देश के गौरव का प्रतीक है—इसका सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व का विषय होना चाहिए।