summer express , मोगा। मोगा के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में शव रखने की व्यवस्था को लेकर वीरवार देर रात पुलिस और इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के बीच विवाद हो गया। करीब रात 10:30 बजे शुरू हुआ विवाद मोर्चरी में जगह और डीप फ्रीजर की व्यवस्था को लेकर हुआ। बताया जा रहा है कि मोर्चरी के डीप फ्रीजर पिछले करीब तीन सप्ताह से खराब पड़े हैं, जिसके कारण शवों को सुरक्षित रखने में परेशानी आ रही है।
जानकारी के अनुसार, वीरवार देर रात पुलिस एक शव लेकर मोगा के सरकारी अस्पताल पहुंची थी। पुलिस ने शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखने का अनुरोध किया। इस पर इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मोर्चरी में जगह उपलब्ध नहीं होने की बात कही। डॉक्टर ने पुलिस को शव को फरीदकोट या मोगा के गांव सिंघावाला स्थित मोर्चरी में रखने के लिए लिखकर दिया।
पुलिस ने डॉक्टर की इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई और शव को मोगा अस्पताल की मोर्चरी में ही रखने की मांग की। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर अस्पताल के अन्य कर्मचारी और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत कराया।
अस्पताल की मोर्चरी में एक समय में करीब आठ शव रखने की क्षमता बताई जा रही है। शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां डीप फ्रीजर लगाए गए हैं, लेकिन इनमें से फ्रीजर करीब तीन सप्ताह से खराब बताए जा रहे हैं। ऐसे में मोर्चरी की क्षमता सीमित होने के साथ ही शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में शवों को पोस्टमार्टम, पहचान और अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक निर्धारित प्रक्रिया के तहत मोर्चरी में रखा जाता है। खासकर अज्ञात शवों को सुरक्षित रखना पुलिस के लिए जरूरी होता है। मोर्चरी में जगह नहीं होने की स्थिति में शवों को दूसरी जगह भेजना पड़ता है।
वीरवार रात भी इसी समस्या के कारण पुलिस को शव दूसरी मोर्चरी में रखने की व्यवस्था करनी पड़ी। आखिरकार शव को गांव सिंघावाला स्थित मोर्चरी में रखा गया। लंबे समय से खराब पड़े डीप फ्रीजर के कारण भविष्य में एक साथ अधिक शव आने पर अस्पताल प्रशासन के सामने परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसे में खराब फ्रीजर की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी हो गया है।