समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब के सरकारी चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), पटियाला में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया है। इसके साथ ही यह किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला पंजाब का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि यह जटिल सर्जरी 10 सितंबर को की गई थी। इसके बाद मरीज और किडनी दान करने वाली उसकी पत्नी दोनों की हालत स्थिर है और वे ट्रांसप्लांट आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। संगरूर जिले के नामोल स्थित रोमाणा पत्ती निवासी 37 वर्षीय मरीज मेम्ब्रेनोप्रोलिफेरेटिव ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (एमपीजीएन) के कारण किडनी फेल होने की समस्या से पीड़ित था। वह दिसंबर 2025 से सप्ताह में तीन बार हीमोडायलिसिस करा रहा था। चिकित्सकीय जांच के बाद उसकी 29 वर्षीय पत्नी ने किडनी दान की। मंत्री ने वीडियो कॉल के माध्यम से दोनों से बातचीत कर स्वास्थ्य की जानकारी ली।
पूरी प्रक्रिया मुफ्त: डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, ट्रांसप्लांट और संबंधित उपचार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त किया गया, जिससे परिवार पर कोई खर्च नहीं आया। उन्होंने बताया कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसी प्रक्रिया पर करीब आठ से 12 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। यह उपलब्धि मोहाली स्थित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में सफल लिवर ट्रांसप्लांट के बाद सरकारी क्षेत्र में अंग प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक और कदम है।
मंत्री ने ट्रांसप्लांट कार्यक्रम स्थापित करने में पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सर्जिकल निगरानी के लिए संस्थान के विशेषज्ञों का आभार जताया। सर्जिकल टीम का नेतृत्व प्रो. सरबप्रीत सिंह ने किया, जबकि नेफ्रोलॉजी टीम का नेतृत्व डॉ. ठाकुरवीर कोहली और एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. तनवीर कुंद्रा ने किया।