Summer express, फरीदाबाद। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश की मंडियों में धान और बाजरा खरीद की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में अनाज की आवक, खरीद, उठान, भंडारण और किसानों को किए जा रहे भुगतान से संबंधित जानकारी ली गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को मंडियों में फसल बेचने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो और खरीदे गए अनाज का समय पर उठान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की मंडियों में कुल 18.06 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 11.90 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, जबकि 4.88 लाख मीट्रिक टन के करीब धान का उठान किया जा चुका है। मंत्री ने अधिकारियों से मंडियों में अनाज की सुरक्षा और उसके उचित भंडारण के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी भी ली।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक 48,152 किसानों को लगभग 758 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए राजेश नागर ने कहा कि किसानों को उनकी फसल की राशि निर्धारित समय पर मिलनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि भुगतान से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुचारु रखा जाए और किसानों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
खरीद एजेंसियों के प्रदर्शन की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 7.02 लाख मीट्रिक टन, हैफेड ने 3.50 लाख मीट्रिक टन और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 1.38 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है। मंत्री ने एजेंसियों को खरीद और उठान के कार्य में समन्वय बनाए रखने तथा मंडियों में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
हाल ही में हुई हल्की बूंदाबांदी का उल्लेख करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को मौसम में बदलाव के मद्देनजर सतर्क रहने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडियों में खुले में रखे अनाज को बारिश और नमी से बचाने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। साथ ही, खरीदे गए अनाज के सुरक्षित भंडारण और समय पर उठान पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि किसानों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि खरीद सीजन के दौरान किसानों की सुविधा, समय पर भुगतान और अनाज की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों और खरीद एजेंसियों को नियमित निगरानी रखते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।