Summer express, झज्जर। वर्ष 2023-24 में वायु प्रदूषण के हॉटस्पॉट रहे गांव खैरपुर में कृषि विभाग ने PM2.5 एयर क्वालिटी सेंसर स्थापित किया है। उप कृषि निदेशक, झज्जर के निर्देश पर लगाए गए इस सेंसर के माध्यम से गांव में वायु प्रदूषण के स्तर पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे प्रदूषण की स्थिति का आकलन करने और पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की निगरानी में मदद मिलेगी।
उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सुनील कौशिक ने बताया कि फसल अवशेष जलाना वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है और कानूनन प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त की ओर से 23 सितंबर से 23 नवंबर 2026 तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. कौशिक के अनुसार, पराली जलाने पर जमीन के रकबे के आधार पर जुर्माना लगाया जा सकता है। दो एकड़ तक भूमि पर पराली जलाने के मामले में 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 30,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा, संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री की सिफारिश भी की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उनके वैकल्पिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना है।
डॉ. कौशिक ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं और फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए उपलब्ध विकल्पों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। इसलिए पर्यावरण और जमीन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन जरूरी है।