गुलशन धनोआ | देहरा-:पौंग जलाशय (महाराणा प्रताप झील) में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने बेही क्षेत्र में मछली के बीज जलाशय में छोड़े। इस दौरान मत्स्य विभाग की डिप्टी डायरेक्टर आंचल ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहीं।आंचल ठाकुर ने बताया कि प्रदेश के जलाशयों में हर वर्ष मछली उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रजातियों के मछली बीज डाले जाते हैं।
इसी अभियान के तहत इस वर्ष अब तक पौंग जलाशय में करीब 13 लाख मछली के बीज छोड़े जा चुके हैं। इनमें इंडियन मेजर कार्प (IMC) की कतला, रोहू और मृगल के साथ ग्रास कार्प की प्रजातियां शामिल हैं।उन्होंने बताया कि बेही में आयोजित अभियान के दौरान विशेष रूप से शुद्ध कतला प्रजाति के मछली बीज जलाशय में छोड़े गए। इस मौके पर जंबल पंचायत के प्रधान, देहरा फिश कोऑपरेटिव सोसाइटी के प्रधान, स्थानीय लोग और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, एडीएफ शिमला और एडीएफ पालमपुर ने पर्यवेक्षक के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
मछली उत्पादन बढ़ने से मजबूत होगी मछुआरों की आर्थिक स्थिति
डिप्टी डायरेक्टर आंचल ठाकुर ने कहा कि जलाशयों में मछली के बीज डालने का प्रमुख उद्देश्य भविष्य में मछली उत्पादन बढ़ाना और मछुआरों की आय में इजाफा करना है। पौंग जलाशय में मत्स्य आखेट यहां की फिश कोऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े कई परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है।उन्होंने कहा कि जलाशय में मछलियों की संख्या और उत्पादन बढ़ने से मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे उनकी आमदनी बढ़ने के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। विभाग मछुआरों के हितों को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष इस तरह के अभियान चला रहा है।