Dharamshala, Rahul
धर्मशाला—जहाँ हिमाचल की वादियाँ पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं, वहीं कांगड़ा की समृद्ध कला और विरासत भी यहां आने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। धर्मशाला का कांगड़ा कला संग्रहालय आजकल पर्यटकों की नई पसंद बनता जा रहा है। क्या है इस संग्रहालय की खासियत, जानिए हमारी इस ख़ास रिपोर्ट में.
धर्मशाला की वादियों में बसा कांगड़ा कला संग्रहालय न सिर्फ इतिहास और संस्कृति का आइना है, बल्कि यह कला प्रेमियों के लिए भी एक अद्भुत स्थान बन गया है। बीते वर्ष यहां लगभग 29,919 पर्यटक पहुंचे जिनमें से लगभग 5,000 विदेशी सैलानी थे। इन सैलानियों ने यहां प्रदर्शित प्राचीन सभ्यता, चित्रकला और शिल्प के दुर्लभ नमूनों का आनंद लिया।
हालांकि इस वर्ष अब तक केवल 13,000 के करीब पर्यटक ही यहां आ पाए हैं, जिसका मुख्य कारण राज्य में हाल ही में आई भारी वर्षा और उससे हुए नुकसान को माना जा रहा है.
ग्वालियर से धर्मशाला घूमने आए राजेंद्र कुमार ने बताया कि भले ही उनकी पृष्ठभूमि कॉमर्स की रही हो, लेकिन इस संग्रहालय में आकर उन्हें शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने कांगड़ा आर्ट की विविधता और उसकी गहराई को बेहद सराहा।ग्वालियर की ही ममता श्रीवास्तव ने कहा कि यहां की पेंटिंग्स की बारीकियां और उनके रंग संयोजन वाकई लाजवाब हैं। वहीं आरके श्रीवास्तव ने बताया कि संग्रहालय में 17वीं से लेकर 20वीं शताब्दी तक की दुर्लभ कलाकृतियों को जिस तरह सहेजा गया है, वह देखना एक अनूठा अनुभव है।
कहना गलत नहीं होगा कि कांगड़ा कला संग्रहालय न सिर्फ धर्मशाला का गौरव है, बल्कि यह अतीत की उन कहानियों को जीवित रखे हुए है जो अब सिर्फ चित्रों और शिल्प में ही मौजूद हैं। यहां की चित्रकला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को देखकर ऐसा लगता है मानो समय थम गया हो… और ये तस्वीरें आज भी कुछ कहने को तैयार हैं।