Shimla, 16 June
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा श्री राम मंदिर, शिमला में आयोजित सात दिवसीय श्रीकृष्ण कथा का समापन दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मचिंतन के संदेशों के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन संस्थान की विदुषी साध्वी सुश्री रुपेश्वरी भारती जी ने प्रभु श्रीकृष्ण की लीलाओं को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को भीतर की यात्रा पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “श्रीकृष्ण कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो भीतर से व्यक्ति को रूपांतरित करती है। जब अंतर्मन में ब्रह्मज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है, तभी सच्चे आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत होती है।”
श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए साध्वी जी ने कहा, “प्रभु पदार्थ नहीं, भाव के भूखे हैं। सच्ची भक्ति वही है जो निस्वार्थ समर्पण पर आधारित हो।”
समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “बाहरी उपाय तब तक स्थायी नहीं हो सकते, जब तक व्यक्ति का अंतःकरण ब्रह्मज्ञान द्वारा प्रकाशित न हो। आत्मा का जागरण ही युग परिवर्तन का आधार बन सकता है।”
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा, संत निरंकारी मिशन शिमला संयोजक हेमराज भारद्वाज, तथा पंजाब नूरमहल से आए स्वामी गिरिधरानंद एवं स्वामी धीरानंद उपस्थित थे।
कथा के अंतिम दिन रुक्मणी विवाह का भावमय वर्णन किया गया, जिसे श्रोताओं ने अत्यंत श्रद्धा और भावविभोर होकर सुना। साध्वी जी ने इस विवाह को आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक बताया। समापन पर श्रद्धालु भजन कीर्तन में झूम उठे और सामूहिक आरती में भाग लिया।
संस्थान का संदेश:
साध्वी जी ने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का लक्ष्य सम्पूर्ण मानवता को ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ईश्वर से जोड़ना और वैश्विक आध्यात्मिक एकता की स्थापना करना है।