16 June, 2025
एक तरफ जहाँ लोग इलाज के लिए डॉक्टरों की शरण लेते हैं, वहीं अब एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ रही है — जरूरत से ज़्यादा दवाइयों का सेवन खुद मरीजों के लिए एक नया खतरा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हर साल लाखों लोग ओवरमेडिकेशन (दवाइयों की अधिकता) के कारण गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में तो मौतें भी दवा के साइड इफेक्ट्स या ड्रग इंटरैक्शन की वजह से हो रही हैं।
क्या है समस्या?
डॉक्टरों की जल्दबाज़ी में दी गई पर्चियों में 5 से 6 दवाइयाँ आम बात हो गई है। मरीज़ बिना सवाल किए इन दवाओं का सेवन करते हैं — विटामिन से लेकर एंटीबायोटिक तक — जबकि उनकी ज़रूरत केवल 1 या 2 दवाओं की होती है।
वरिष्ठ चिकित्सक, कहते हैं:
“भारत में ‘दवाई = इलाज’ की सोच बहुत गहरी है। लोग डॉक्टर से दवा न मिले तो मानते ही नहीं कि इलाज हुआ। इससे फार्मा कंपनियों की बिक्री तो बढ़ती है, लेकिन मरीज़ की सेहत घटती है।”
चौंकाने वाले आंकड़े:
- WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर तीसरा बुज़ुर्ग 5 या उससे अधिक दवाइयाँ रोज़ खा रहा है।
- हर साल अनुमानित 1.5 लाख लोग दवाइयों के साइड इफेक्ट से पीड़ित होते हैं।
- बच्चों में भी ओवरडोज़ और गलत दवा देना एक बड़ा खतरा बन चुका है।
क्या करें आप?
- डॉक्टर से हर दवा की जरूरत और विकल्प के बारे में पूछें।
- खुद से गूगल कर दवाओं का सेवन न करें।
- घरेलू नुस्खों या बिना जांच की दवा लेने से बचें।
- नियमित ब्लड टेस्ट और फॉलोअप से शरीर की प्रतिक्रिया पर नज़र रखें।