बीजापुर | बीजापुर जिले के पेद्दाकोरमा गांव में नक्सलियों ने एक बार फिर खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेता दिनेश मोडियम के परिजनों में से तीन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि सात ग्रामीणों को गंभीर रूप से पीटा गया और 12 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया। यह हमला नक्सली कमांडर वेला के नेतृत्व में किया गया। घटना की पुष्टि करते हुए बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने बताया कि पुलिस बल को मौके पर रवाना कर दिया गया है।
आत्मसमर्पण करने वालों को नक्सलियों का बदला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हमला नक्सलियों की प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। माना जा रहा है कि आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों के परिजनों को निशाना बनाकर नक्सली स्थानीय लोगों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करना चाहते हैं। घटना के बाद गांव में तनाव व्याप्त है और सुरक्षा बलों को इलाके में घुसने में कठिनाई हो रही है, क्योंकि वहां घात या आईईडी हमलों का खतरा बना हुआ है।
नक्सलियों के खिलाफ चल रहे हैं सघन अभियान
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत छत्तीसगढ़ में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, जिसमें अबूझमाड़ और इंद्रावती नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। हाल ही में 31 माओवादियों को मार गिराने की कार्रवाई नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका मानी जा रही है।
सरकार की पुनर्वास नीति और चुनौतियां
राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल होने की नीति चला रही है, जिसके अंतर्गत रोजगार, शिक्षा और वित्तीय सहायता दी जा रही है। हालांकि, इस ताजा घटना से यह साफ है कि नक्सली अब भी हिंसक रणनीति के ज़रिये अपने विरोधियों और आत्मसमर्पित साथियों पर कहर बरपा रहे हैं।
नक्सलवाद से निपटने के लिए समुदाय का सहयोग जरूरी
यह वारदात बताती है कि नक्सलवाद से लड़ाई सिर्फ सुरक्षा बलों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतना, उन्हें सुरक्षित वातावरण देना और पुनर्वास योजनाओं को मजबूती से लागू करना अनिवार्य है। साथ ही आत्मसमर्पण करने वालों की सुरक्षा भी सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी बनती है।