देहरादून | चारधाम यात्रा मार्ग पर एक बार फिर हेलीकॉप्टर दुर्घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। बीते रविवार केदारनाथ से लौटते समय आर्यन एविएशन का एक हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट समेत सभी 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा 30 अप्रैल से शुरू हुई तीर्थ यात्रा के महज डेढ़ महीने में पांचवां हेलीकॉप्टर क्रैश है। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अनुभवी पायलट ने गिनाईं वजहें
सेना और निजी हेली ऑपरेटरों के लिए 15 वर्षों से ज्यादा उड़ान भर चुके एक अनुभवी पायलट ने बताया कि चारधाम क्षेत्र मौसम की तेज़ी से बदलती स्थितियों, ऊंचाई और संकरी घाटियों के चलते बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि पायलटों को इस क्षेत्र में उड़ान भरने से पहले पर्याप्त क्षेत्र-विशेष प्रशिक्षण नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि “DGCA की मौजूदा गाइडलाइंस इस क्षेत्र की कठिनाइयों के लिहाज़ से नाकाफी हैं। अमरनाथ जैसे रूट की तुलना में चारधाम क्षेत्र ज्यादा जटिल है।”
राजवीर सिंह चौहान का उदाहरण
रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर के पायलट राजवीर सिंह चौहान सेना से रिटायर्ड और अनुभवी थे, लेकिन चारधाम और व्यावसायिक उड़ानों के लिहाज़ से नए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि चारधाम मार्ग पर उड़ानों से पहले कम से कम 50 घंटे का क्षेत्रीय प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए, वह भी अधिकृत प्रशिक्षक की निगरानी में।
बुनियादी ढांचे और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
पायलटों ने यह भी बताया कि मौजूदा बुनियादी ढांचा क्षेत्र की जरूरतों के मुताबिक बेहद कमजोर है। केदारनाथ में एक हेलीपैड ‘वीआईपी मूवमेंट’ के लिए आरक्षित है जबकि दूसरे पर अत्यधिक दबाव रहता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जब VIP मूवमेंट न हो तो दोनों हेलीपैड का समान उपयोग हो और गुप्तकाशी में सहस्रधारा की तर्ज़ पर बड़ा हेलीपैड बनाया जाए।
वाणिज्यिक दबाव और थकी हुई उड़ानें
कई पायलट कंपनियों के वाणिज्यिक दबाव में दिनभर लगातार उड़ानें भरने को मजबूर होते हैं। इससे उनकी सतर्कता पर असर पड़ता है। पायलटों ने मांग की कि एक दिन में अधिकतम उड़ानों की सीमा तय होनी चाहिए और उड़ानों के बीच पर्याप्त आराम सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उड़ानों को केवल सूरज निकलने के 30 मिनट बाद और डूबने के 30 मिनट पहले तक की अनुमति होनी चाहिए।
हेलीकॉप्टर ट्रैफिक पर नियंत्रण जरूरी
इस रूट पर 8-9 कंपनियां शटल सेवा चला रही हैं और चार्टर्ड उड़ानों के लिए 15 से ज्यादा ऑपरेटर सक्रिय हैं। विशेषज्ञों ने हेली कंपनियों की संख्या सीमित करने, टिकट दरों में वृद्धि और एक केंद्रीय “कमांड एंड कंट्रोल सेंटर” स्थापित करने की मांग की है जिससे उड़ानों की निगरानी बेहतर हो सके।
DGCA ने की कार्रवाई, दो पायलटों के लाइसेंस निलंबित
केदारनाथ हादसे के बाद नागर विमानन मंत्रालय ने आर्यन एविएशन की सेवा तत्काल प्रभाव से बंद कर दी है। साथ ही DGCA ने दो अन्य पायलटों के लाइसेंस भी छह महीने के लिए निलंबित कर दिए हैं। मंत्रालय ने केदारनाथ घाटी में उड़ानों की सक्रिय निगरानी के लिए तकनीकी अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए हैं।