Shimla, 20June-पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने संसद द्वारा गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में भाग लेते हुए “एक देश-एक चुनाव” के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने इसे देश के विकास और स्थिर शासन व्यवस्था के लिए आवश्यक करार दिया। ठाकुर ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से न केवल नीति-निर्माण बाधित होता है, बल्कि धन और संसाधनों की भी भारी बर्बादी होती है।
जयराम ठाकुर ने समिति के सामने स्पष्ट किया कि वर्ष 1951 से 1967 तक देश में एक साथ चुनाव की प्रणाली प्रभावी ढंग से चली और हिमाचल प्रदेश में 1977 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस व्यवस्था को पुनः लागू करने की पहल प्रशंसनीय है, जो लोकतंत्र को मजबूत और सुचारू बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
जयराम ठाकुर ने यह भी सुझाव दिया कि जैसे चुनाव व्यवस्था में एकरूपता लाई जा रही है, उसी तरह देश में विधान परिषदों को लेकर भी एक समान प्रणाली अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में विधान परिषदें हैं, जबकि कई राज्यों में नहीं, जिससे असमानता की स्थिति बनती है। उनके इस सुझाव को समिति द्वारा गंभीरता से लिया गया और उचित मंच तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।
राज्य सरकार पर हमला — मंत्री और विधायक खुद नाराज़
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार की स्थिति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार आंतरिक कलह से जूझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के अपने मंत्री और विधायक ही नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और समय-समय पर इस्तीफे की धमकी दे चुके हैं।जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद विपक्ष पर सरकार गिराने का आरोप लगाते हैं, जबकि असली संकट उनकी पार्टी और सरकार के भीतर है। कांग्रेस के छह विधायक और तीन निर्दलीय विधायक पहले ही समर्थन वापस ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में भी सरकार को हार का सामना करना पड़ा, जो साफ दर्शाता है कि कांग्रेस सरकार अब विश्वसनीयता खो चुकी है।