नई दिल्ली | सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय जल्द ही थर्ड पार्टी मोटर बीमा प्रीमियम की दरों में संशोधन कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, औसतन 10% तक की बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि, कमर्शियल वाहनों पर यह बढ़ोतरी अधिक हो सकती है, जबकि स्कूल बसों और अन्य सामाजिक सेवा वाहनों पर दरें यथावत रह सकती हैं या बहुत मामूली बढ़ाई जाएंगी।
बीमा कंपनियों की मांग और दबाव
बीमा कंपनियों ने केंद्र सरकार और बीमा नियामक संस्था IRDAI को पत्र लिखकर अप्रैल 2025 से प्रीमियम में 5–15% तक वृद्धि की मांग की है। उनका कहना है कि:
- अदालती आदेशों के चलते दावों की राशि में बढ़ोतरी हुई है
- महामारी के दौरान दावों का असंतुलित चक्र सामने आया
- तत्काल भुगतान वाले दावों से वित्तीय दबाव बढ़ा है
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “थर्ड पार्टी सेगमेंट में लगातार घाटा हो रहा है, और अब दरों में ठोस बढ़ोतरी आवश्यक हो गई है।”
थर्ड पार्टी बीमा क्यों जरूरी?
थर्ड पार्टी बीमा भारत में मोटर वाहन अधिनियम के तहत कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस बीमा का प्रीमियम हर साल पिछले वर्षों के दावों के आंकड़ों के आधार पर तय किया जाता है। बीमा दरों को अंतिम रूप देने से पहले मंत्रालय, IRDAI के साथ परामर्श करता है।
बीते वर्षों में कैसा रहा ट्रेंड?
- 2018 से अब तक प्रीमियम दरों में वृद्धि केवल 2–3% के बीच रही
- 2021 में कोई बदलाव नहीं हुआ
- 2022 और 2023 में हल्के संशोधन हुए
- 2023-24 में शुद्ध दावा अनुपात 82%, जबकि अंतिम नुकसान अनुपात 88–91% दर्ज किया गया
नई दरें कब से लागू होंगी?
- संभवत: 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो सकती हैं
- या फिर 1 अप्रैल 2026 से नई दरें प्रभाव में आ सकती हैं
- मंत्रालय दरों को पिछली तिथि से लागू नहीं करेगा, यानी रेट्स रेट्रोस्पेक्टिव नहीं होंगे