जालंधर | लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव का परिणाम 23 जून को घोषित किया जाएगा और इसके साथ ही पंजाब की राजनीति में बड़े बदलावों की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो उपचुनाव के नतीजों के बाद पंजाब मंत्रिमंडल में फेरबदल लगभग तय माना जा रहा है। इस सियासी हलचल का असर जालंधर जैसे अहम शहर पर भी पड़ सकता है, जहां लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है।
जालंधर में अस्थिर राजनीति और AAP की कमजोर स्थिति
2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने जालंधर की चार सीटों में से दो पर जीत दर्ज की थी—शीतल अंगुराल और रमन अरोड़ा। लेकिन अब पार्टी की पकड़ यहां कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
- शीतल अंगुराल पहले ही पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
- रमन अरोड़ा भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नाभा जेल में बंद हैं। उन पर नगर निगम के एटीपी सुखदेव वशिष्ठ के साथ मिलकर अवैध कॉलोनियों को संरक्षण देने और अवैध वसूली के आरोप हैं।
एटीपी वशिष्ठ की गिरफ्तारी के बाद जालंधर के सेंट्रल, कैंट, वेस्ट और नॉर्थ इलाकों में अवैध निर्माण से जुड़े कई मामले सुर्खियों में आए थे। हाल में विजिलेंस जांच के चलते यह गतिविधियाँ कुछ समय के लिए शांत पड़ी हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ‘आप’ नेतृत्व अभी भी इस पूरे मामले को लेकर सतर्क है। रमन अरोड़ा के साथ-साथ अन्य नेताओं पर भी निगरानी रखी जा रही है।
AAP नेतृत्व में बदलाव के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, लुधियाना उपचुनाव के नतीजे ‘आप’ के कई नेताओं की सियासी हैसियत तय करेंगे। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में कुछ पुराने चेहरों से जिम्मेदारियां छीनी जा सकती हैं, वहीं कुछ नए चेहरों को आगे लाया जा सकता है। इस संबंध में मनीष सिसोदिया पहले ही इशारा दे चुके हैं कि चुनाव परिणाम के आधार पर संगठनात्मक बदलाव संभव हैं।
नतीजों पर टिकी हैं निगाहें
अब सबकी नजर 23 जून को आने वाले लुधियाना वेस्ट उपचुनाव के परिणामों पर टिकी है। यह साफ होगा कि कौन नेता अपनी स्थिति मजबूत करेगा और किसकी सियासी जमीन खिसक सकती है। जालंधर, जो पहले ही सियासी अस्थिरता का केंद्र बना हुआ है, वहां इस बदलाव की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे सकती है।