नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार इस सप्ताह पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रमों की दिशा पर निर्भर रहेगा। खासतौर पर इजरायल-ईरान के बीच जारी तनाव और इसके चलते आपूर्ति श्रृंखला पर संभावित प्रभाव, निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मानसून की प्रगति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
ग्लोबल फैक्टर्स पर होगी नजर
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजित मिश्रा के अनुसार, “बाजार की दिशा इस सप्ताह मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों से तय होगी। इजरायल-ईरान तनाव, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व अधिकारियों की टिप्पणियां प्रमुख कारक होंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू स्तर पर निवेशक मानसून की स्थिति, डेरिवेटिव्स के निपटान, कच्चे तेल के भाव और एफआईआई की हिस्सेदारी पर करीबी नजर बनाए रखेंगे।
पिछले हफ्ते बाजार में तेजी
बीते सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में 1,046 अंकों यानी 1.58% की बढ़त दर्ज की गई और यह 82,408.17 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 319 अंक या 1.59% की तेजी के साथ 25,112.40 के स्तर पर पहुंच गया।
अमेरिकी डेटा और पीएमआई भी अहम
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर ने बताया, “भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी बाजार पर असर डाल रही है। इस सप्ताह निवेशक अमेरिका की GDP वृद्धि दर, PCE (पर्सनल कंजंप्शन एक्सपेंडिचर) और भारत के पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) आंकड़ों पर खास नजर रखेंगे।”
एफपीआई की भूमिका भी रहेगी महत्वपूर्ण
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एसेट मैनेजमेंट रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस पीएमआई के आंकड़े, वैश्विक बाजार के संकेतों को और धार देंगे। साथ ही, भू-राजनीतिक घटनाएं निवेशकों के रुख को भी प्रभावित करेंगी।”
एफपीआई गतिविधियों पर बात करते हुए वॉटरफील्ड एडवाइजर्स के वरिष्ठ निदेशक विपुल भोवार ने बताया कि, “अप्रैल में एफपीआई का प्रवाह सुस्त रहा था, लेकिन मई में इसमें उल्लेखनीय तेजी आई, जो बीते आठ महीनों में सबसे अधिक रही। हालांकि जून में वैश्विक तनाव को देखते हुए बाजार में सतर्कता के साथ सकारात्मक माहौल बना हुआ है।”