नई दिल्ली/संभल | ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के एक बयान ने योग दिवस के मौके पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। रजवी ने सूर्य नमस्कार को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए इसे ‘हराम’ करार दिया है। हालांकि, उन्होंने योग को लाभदायक बताया और उसका समर्थन भी किया।
रजवी के बयान पर उत्तर प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री जेपीएस राठौर और होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। राठौर ने कहा कि “इससे ज्यादा संकीर्ण सोच की बात नहीं हो सकती,” जबकि प्रजापति ने सूर्य नमस्कार को एक तरह का प्राणायाम बताते हुए कहा कि नमाज में भी शारीरिक क्रियाएं की जाती हैं, जो योग जैसी ही होती हैं।
योग का विरोध नहीं, सूर्य नमस्कार से परहेज: रजवी
बरेली की दरगाह आला हजरत में शनिवार सुबह योग अभ्यास के बाद मौलाना रजवी ने स्पष्ट किया कि वे योग के पक्षधर हैं, लेकिन सूर्य नमस्कार को इस्लाम विरोधी मानते हैं। उन्होंने कहा कि सूरज की पूजा करना इस्लाम में मान्य नहीं है, इसलिए मुस्लिम समुदाय को इससे दूर रहना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि योग मस्जिदों और मदरसों में भी कराया जाना चाहिए क्योंकि यह शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
मदरसों में योग, मुस्लिम छात्रों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा
संभल जिले के मदरसों में योग दिवस को लेकर खासा उत्साह दिखा। मदरसा हमीदिया अशरफिया, सिराजुल उलूम और ज़ियाउल उलूम सरायतरीन जैसे संस्थानों में मुस्लिम छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। कार्यक्रमों में वज्रासन, पद्मासन, आकर्ण धनुरासन और पश्चिमोत्तानासन जैसे योग मुद्राओं का अभ्यास हुआ।
इमामे ईदगाह मौलाना जहिरूल इस्लाम ने भी योग का समर्थन करते हुए कहा, “उर्दू में योग को ‘वर्ज़िश’ कहते हैं, और इस्लाम में इससे कोई परहेज नहीं है।”
सरकार का रुख स्पष्ट
योग को लेकर सरकार ने साफ कहा है कि यह धार्मिक नहीं, स्वास्थ्य से जुड़ा अभ्यास है। मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि “सूर्य नमस्कार को केवल एक व्यायाम के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पूजा के रूप में।”